मुजफ्फरनगर में साइबर क्राइम पुलिस ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 85 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले गैंग का पर्दाफाश किया है। छह महीने में 70 शिकायतों से जुड़े इस मामले में तीन आरोपी गिरफ्तार हुए हैं। जिनमें दो सिर्फ पांचवी पास हैं। ठगी की रकम को USDT में कन्वर्ट कर कमीशन पर आगे भेजा जाता था। पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है।

डिजिटल अरेस्ट (Img: Google)
Muzaffarnagar: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को डराकर करोड़ों रुपये ठगने वाला एक शातिर गैंग आखिरकार पुलिस के हत्थे चढ़ गया। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में बैठकर ये गैंग देशभर के लोगों को निशाना बना रहा था। सिर्फ छह महीने में 70 शिकायतें और करीब 85 करोड़ रुपये की ठगी ये आंकड़ा सुनकर ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि खेल कितना बड़ा था। हैरानी की बात ये है कि गैंग के दो सदस्य महज पांचवी पास हैं और पहले कपड़े सिलने का काम करते थे।
मुजफ्फरनगर की साइबर क्राइम पुलिस ने तीन युवकों को गिरफ्तार किया है जो डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लोगों को कॉल कर खुद को अधिकारी बताते थे और डर का माहौल बनाकर पैसे ट्रांसफर करा लेते थे। पुलिस के मुताबिक इस गैंग ने ऑल इंडिया लेवल पर 70 शिकायतों में करीब 85 करोड़ रुपये का फ्रॉड किया है।
एसपी क्राइम इंदु सिद्धार्थ ने बताया कि एमएचए के प्रतिबिंब पोर्टल की लगातार मॉनिटरिंग के दौरान तमिलनाडु से 4.5 करोड़ रुपये के डिजिटल अरेस्ट मामले की जानकारी मिली। जांच में पता चला कि ठगी की रकम मुजफ्फरनगर से निकाली गई है।
गिरफ्तार आरोपियों में नदीम और गुफरान चरथावल थाना क्षेत्र के रहने वाले हैं और दोनों सिर्फ पांचवी पास हैं। पहले ये लोग सिलाई का काम करते थे, लेकिन जल्दी पैसे के लालच में साइबर ठगी की दुनिया में उतर गए। तीसरा सदस्य मयूर अफजल राणा है, जो USDT के क्रय-विक्रय का काम करता था और ठगी की रकम को क्रिप्टो में कन्वर्ट कराने में मदद करता था।
पुलिस पूछताछ में सामने आया कि जिन खातों में फ्रॉड का पैसा आता था, उन्हें ये लोग खुद ऑपरेट करते थे। कैश निकालने के बाद रकम को USDT में ट्रांसफर किया जाता था और 5 से 10 प्रतिशत कमीशन रखकर बाकी पैसा आगे बढ़ा दिया जाता था।
जांच में पता चला है कि गैंग जरूरतमंद लोगों, ड्राइवरों या रेहड़ी लगाने वालों के बैंक खाते इस्तेमाल करता था। खातों में पैसा मंगाकर तुरंत विड्रॉल और फिर क्रिप्टो ट्रांजैक्शन कर दिया जाता था ताकि ट्रैकिंग मुश्किल हो जाए। पुलिस ने खातों और फोन नंबरों की डिटेल एनालाइज की तो देशभर में 70 शिकायतें जुड़ी मिलीं। जिन खातों से पैसा निकाला गया, उनमें करीब 60 लाख रुपये के सीधे ट्रांजैक्शन का पता चला है।
तमिलनाडु की शिकायत के बाद जब रकम का ट्रेल मुजफ्फरनगर पहुंचा तो पुलिस ने तेजी दिखाते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। फिलहाल अन्य खातों और नेटवर्क की गहन जांच जारी है।
एसपी क्राइम इंदु सिद्धार्थ ने कहा कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती। अगर कोई खुद को अधिकारी बताकर वीडियो कॉल या फोन पर डराकर पैसे मांगे तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें। पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।