नाक में उग रहा था दांत, दिल्ली-लखनऊ नहीं जाना पड़ा… एम्स गोरखपुर में हुई अनोखी बाल सर्जरी

एम्स गोरखपुर में डॉक्टरों ने दो साल के बच्चे की नाक में उगे दांत को सफल सर्जरी से निकाला। कटे होंठ की समस्या से जूझ रहे बच्चे को सांस लेने में दिक्कत थी। समय पर इलाज से गंभीर जटिलताओं को टाला गया।

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 19 January 2026, 5:29 PM IST

Gorakhpur: ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स), गोरखपुर के डॉक्टरों ने चिकित्सा जगत में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यहां जन्म से कटे होंठ (क्लेफ्ट लिप) की समस्या से जूझ रहे दो साल के मासूम बच्चे की नाक से दांत निकालने की दुर्लभ और जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया है। यह मामला न केवल बेहद दुर्लभ था, बल्कि पूर्वांचल क्षेत्र में इतनी कम उम्र के बच्चे पर इस तरह की सर्जरी पहली बार की गई है।

कटे होंठ वाले मासूम की नाक से निकाला गया दांत

बिहार के भोजपुर जिले का रहने वाला यह बच्चा पिछले कई महीनों से जबड़े और नाक में लगातार दर्द से परेशान था। परिजनों के अनुसार, बच्चे को बाईं नाक से सांस लेने में कठिनाई, बार-बार नाक बहना और असहजता महसूस होती थी। कई अस्पतालों में दिखाने के बावजूद समस्या की सही पहचान नहीं हो सकी, जिससे परिवार काफी परेशान था।

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आखिरकार बच्चे को एम्स गोरखपुर के डेंटिस्ट्री विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर एवं ओरल एंड मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. शैलेश कुमार के पास लाया गया। विस्तृत जांच और सीटी स्कैन के बाद डॉक्टर भी चौंक गए, जब पता चला कि बच्चे की नाक के भीतर एक दांत उग रहा है। चिकित्सा भाषा में इसे एक्टोपिक टूथ कहा जाता है, जो अत्यंत दुर्लभ स्थिति है और अक्सर कटे होंठ या अन्य जन्मजात विकारों से जुड़ी होती है।

एम्स गोरखपुर में सफल हुई दुर्लभ बाल सर्जरी

डॉ शैलेश कुमार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत सर्जरी की योजना बनाई। बच्चे की उम्र कम होने और नाक के भीतर दांत होने के कारण यह ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था। एनेस्थीसिया विभाग के सहयोग से बच्चे को जनरल एनेस्थीसिया दिया गया और पूरी सावधानी के साथ नाक में मौजूद दांत को सफलतापूर्वक निकाल दिया गया।

डॉ शैलेश ने बताया कि यदि समय रहते इस स्थिति का इलाज न किया जाता, तो बच्चे को गंभीर संक्रमण, बार-बार नाक से खून आना, सांस लेने में स्थायी दिक्कत और चेहरे के विकास में रुकावट जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती थीं। सर्जरी के बाद बच्चे की हालत स्थिर है और अब वह सामान्य रूप से सांस ले पा रहा है।

एम्स ने दिखाया सुपरस्पेशलिटी का दम

एम्स गोरखपुर की डायरेक्टर एवं सीईओ मेजर जनरल (प्रो.) डॉ विभा दत्ता को मामले की जानकारी दी गई। उन्होंने सफल ऑपरेशन के लिए पूरी टीम को बधाई दी और बच्चे की सेहत पर नियमित निगरानी के निर्देश दिए। फिलहाल बच्चा वार्ड में भर्ती है और डॉ शैलेश की निगरानी में तेजी से स्वस्थ हो रहा है।

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इस सर्जरी में डेंटल विभाग के डॉ श्रीनिवास, सीनियर रेजिडेंट डॉ प्रवीण कुमार, जूनियर रेजिडेंट डॉ प्रियंका त्रिपाठी, डॉ सौरभ और डॉ सुमित शामिल रहे। एनेस्थीसिया विभाग से प्रोफेसर डॉ संतोष शर्मा, एसोसिएट प्रोफेसर डॉ विजेता वाजपेयी, जूनियर रेजिडेंट डॉ आशुतोष तथा नर्सिंग स्टाफ पंकज देवी, प्रतिभा और दिव्या ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

डॉ शैलेश कुमार ने बताया कि अब तक इस तरह के मामलों में मरीजों को दिल्ली या लखनऊ जैसे बड़े शहरों में भेजा जाता था, लेकिन अब एम्स गोरखपुर में यह सुविधा उपलब्ध होने से पूर्वांचल और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी। इस अनोखे केस को एक प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल में प्रकाशित करने की तैयारी भी चल रही है।

Location : 
  • Gorakhpur

Published : 
  • 19 January 2026, 5:29 PM IST