झांसी के आंगनवाड़ी केंद्रों में दीवारों पर छिपा है ज्ञान का खजाना, तस्वीरों से सीखेंगे बच्चे!

झांसी में 80 आंगनवाड़ी केंद्रों को मॉडल स्वरूप दिया गया है। रंग-बिरंगी पेंटिंग, स्मार्ट टीवी, किताबों और खेलों के जरिए बच्चों को खेल-खेल में शिक्षा देने की पहल की जा रही है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 25 October 2026, 5:26 PM IST

Jhansi: झांसी में बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों का रूप बदलने की पहल की जा रही है। अब इन केंद्रों की दीवारें सिर्फ रंगों से नहीं सज रहीं, बल्कि बच्चों को अक्षर, गणित, विज्ञान और सामान्य ज्ञान की सीख भी दे रही हैं। कहीं हिंदी और अंग्रेजी के अक्षर नजर आ रहे हैं, तो कहीं रंग-बिरंगी आकृतियां गणित के सवाल आसान बना रही हैं। सौरमंडल से लेकर जीव-जंतुओं तक की तस्वीरें बच्चों की जिज्ञासा बढ़ा रही हैं। इस बदलाव के पीछे मकसद साफ है कि नौनिहालों को शुरुआती उम्र से ही ऐसा माहौल मिले, जहां पढ़ाई बोझ नहीं, बल्कि खेल और मनोरंजन का हिस्सा बने।

झांसी में आंगनवाड़ी केंद्रों को मॉडल बनाने की पहल

झांसी में मुख्य विकास अधिकारी रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड की पहल पर आंगनवाड़ी केंद्रों को मॉडल केंद्रों के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस योजना के तहत बच्चों के सीखने के तरीके को रोचक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। केंद्रों की दीवारों, सीढ़ियों, दरवाजों और खुले स्थानों को इस तरह तैयार किया जा रहा है कि बच्चे अपने आसपास मौजूद चीजों को देखकर और समझकर नई बातें सीख सकें।

80 केंद्रों में दिख रहा बदलाव

झांसी जिले में अब तक 80 आंगनवाड़ी केंद्रों को मॉडल स्वरूप दिया जा चुका है। जिले के आठ विकासखंडों में दस-दस केंद्रों को मॉडल बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। विकासखंड बड़ागांव के कोट (बेहटा) और बबीना के लेवा में तैयार मॉडल आंगनवाड़ी केंद्र इस पहल के उदाहरण हैं। इन केंद्रों की दीवारों पर हिंदी और अंग्रेजी के अक्षर, अंक, ज्यामितीय आकृतियां, दिशाएं और सामान्य ज्ञान से जुड़ी तस्वीरें बनाई गई हैं। बच्चे इन तस्वीरों को देखकर अक्षरों और संख्याओं को पहचान सकते हैं। अलग-अलग आकृतियों और रंगों के जरिए उन्हें शुरुआती गणित समझने में मदद मिल सकती है।

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स्मार्ट टीवी से भी मिलेगी नई जानकारी

मॉडल आंगनवाड़ी केंद्रों में बच्चों की पढ़ाई को और दिलचस्प बनाने के लिए स्मार्ट टीवी की सुविधा भी शामिल की जा रही है। इसके माध्यम से लघु फिल्मों, चित्रों और अन्य रोचक सामग्री के जरिए बच्चों को जानकारी दी जा रही है। जिन विषयों को केवल बोलकर समझाना छोटे बच्चों के लिए मुश्किल हो सकता है, उन्हें दृश्य माध्यम से आसान बनाने की कोशिश की जा रही है। सौरमंडल जैसे विषयों को चित्रों और वीडियो के जरिए समझाने से बच्चों की जिज्ञासा बढ़ सकती है। वे नई चीजों को देखकर सवाल पूछने और उनके बारे में जानने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।

झांसी में आंगनवाड़ी केंद्रों को मॉडल बनाने की पहल (IMG: Dynamite News)

पढ़ाई के साथ स्वच्छता और पोषण पर भी ध्यान

इन मॉडल केंद्रों में शिक्षा के साथ बच्चों की सेहत, स्वच्छता और पोषण को भी महत्व दिया जा रहा है। बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बाल मैत्री शौचालय, हाथ धोने की सुविधा, पीने का पानी और आरओ जैसी व्यवस्थाओं को शामिल किया जा रहा है। इसके अलावा पोषण वाटिका और बगीचे भी मॉडल केंद्रों का हिस्सा बनाए जा रहे हैं। पोषण वाटिका के माध्यम से बच्चों को पौधों और हरियाली से परिचित कराने का अवसर मिल सकता है। वहीं, स्वच्छता से जुड़ी सुविधाएं बच्चों में साफ-सफाई की आदत विकसित करने में सहायक हो सकती हैं।

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BALA की अवधारणा से बदलेगा सीखने का तरीका?

मॉडल आंगनवाड़ी केंद्रों में बिल्डिंग ऐज लर्निंग एड यानी BALA की अवधारणा को अपनाया जा रहा है। इसका मूल विचार है कि भवन के अलग-अलग हिस्सों को ही सीखने के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जाए। दीवारों पर अक्षर और अंक, सीढ़ियों पर शैक्षिक चित्र और खुले स्थानों में उपयोगी गतिविधियां बच्चों को रोजमर्रा के माहौल से सीखने का अवसर देती हैं। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति और पोषण अभियान के उद्देश्यों से भी जुड़ती है। हालांकि, इसकी वास्तविक सफलता केवल भवनों की सजावट या सुविधाओं से तय नहीं होगी।

रंगीन दीवारों से मजबूत होगी शिक्षा की नींव?

झांसी में मॉडल आंगनवाड़ी केंद्रों को विकसित करने की पहल छोटे बच्चों के लिए सीखने का माहौल बेहतर बनाने की दिशा में एक कदम है। तस्वीरों, रंगों, स्मार्ट टीवी और खेल से जुड़ी गतिविधियों के जरिए बच्चों को शुरुआती शिक्षा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

Location :  Jhansi

Published :  25 October 2026, 5:26 PM IST