देवघर पहुंची संसदीय समिति ने बैंकों में हिंदी के कामकाज पर किया मंथन, रोजमर्रा के कामकाज में इस्तेमाल पर की चर्चा

बैंकों में हिंदी का इस्तेमाल सिर्फ बोर्ड और फॉर्म तक सीमित है या ग्राहकों को भी इसका लाभ मिलता है? इसी सवाल के बीच संसदीय राजभाषा समिति की तीसरी उप-समिति देवघर पहुंची है। सांसद श्रीरंग अप्पा बारणे के नेतृत्व में दो दिवसीय निरीक्षण में छह राज्यों से जुड़े सांसद शामिल हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 23 October 2026, 8:06 PM IST

Deoghar: बैंक की शाखा में हिंदी के बोर्ड लगे हैं, फॉर्म हिंदी में उपलब्ध हैं और सूचनाएं भी हिंदी में लिखी हैं। लेकिन क्या बैंक में ग्राहकों का कामकाज भी आसानी से हिंदी में होता है? जब कोई ग्राहक अपनी भाषा में समस्या बताता है, तो क्या उसे उसी भाषा में समाधान मिल पाता है?

सरकारी बैंकों में हिंदी के इस्तेमाल से जुड़े ऐसे सवालों के बीच शुक्रवार को देवघर में संसदीय राजभाषा समिति की तीसरी उप-समिति का निरीक्षण और बैठक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में बैंकों में हिंदी के इस्तेमाल और राजभाषा संबंधी नियमों के पालन की समीक्षा की जा रही है।

इंडियन बैंक के अंचल कार्यालय, देवघर के समन्वय में आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न बैंकों के अधिकारियों और कॉरपोरेट जगत के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक का नेतृत्व संसदीय राजभाषा समिति की तीसरी उप-समिति के संयोजक और महाराष्ट्र के मावल से लोकसभा सांसद श्रीरंग अप्पा चंदू बारणे ने किया। कार्यक्रम में छह राज्यों से जुड़े सांसदों की भागीदारी की जानकारी दी गई है।

संसदीय राजभाषा समिति की तीसरी उप-समिति का निरीक्षण कार्यक्रम (Img: Dynamite News)

हिंदी में बोर्ड लगाना काफी नहीं

सरकारी कार्यालयों में राजभाषा हिंदी के इस्तेमाल की चर्चा अक्सर पत्राचार, सूचनाओं और निर्धारित फॉर्म तक सीमित रह जाती है। लेकिन किसी भाषा का वास्तविक उपयोग इस बात से भी समझा जाता है कि रोजमर्रा के कामकाज में उसका कितना इस्तेमाल हो रहा है।

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बैंकिंग क्षेत्र में यह सवाल खास महत्व रखता है। पेंशनधारियों, किसानों, छोटे कारोबारियों और आम खाताधारकों को बैंक से नियमित रूप से काम पड़ता है। ऐसे में उनके लिए जरूरी जानकारी समझना, अपनी समस्या बताना और बैंकिंग सेवाओं का लाभ लेना आसान होना चाहिए।

संसदीय राजभाषा समिति की निरीक्षण प्रक्रिया के तहत संबंधित संस्थानों में हिंदी के प्रयोग की स्थिति, राजभाषा संबंधी नियमों के पालन और उन्हें लागू करने में आने वाली कठिनाइयों की समीक्षा की जाती है। इस लिहाज से देवघर में आयोजित कार्यक्रम का महत्व केवल हिंदी में उपलब्ध दस्तावेजों तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्थानों के वास्तविक कामकाज की स्थिति भी अहम है।

देवघर में हिंदी के साथ संथाली और क्षेत्रीय भाषाओं का मुद्दा

देवघर धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान वाला शहर है। यह संताल परगना क्षेत्र का हिस्सा भी है, जहां आदिवासी समुदायों की समृद्ध भाषाई और सांस्कृतिक परंपराएं समाज की पहचान से जुड़ी हैं। संथाली समेत विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं का यहां विशेष महत्व है। ऐसे में राजभाषा हिंदी के इस्तेमाल पर चर्चा के साथ स्थानीय भाषाओं और बोलियों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का सवाल भी प्रासंगिक है। सरकारी योजनाओं और बैंकिंग सेवाओं की जानकारी लोगों तक किस भाषा में पहुंचती है, इसका असर उनकी समझ और संस्थानों से जुड़ाव पर पड़ सकता है।

डाइनामाइट न्यूज़ की ओर से सांसद श्रीरंग अप्पा बारणे से पूछा गया कि देवघर और आदिवासी बहुल संताल परगना क्षेत्र में संथाली समेत क्षेत्रीय भाषाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए क्या दिशा-निर्देश दिए गए हैं। इस पर उन्होंने भाषा के प्रति सम्मान और जागरूकता की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि राजभाषा हिंदी के प्रभावी इस्तेमाल के साथ स्थानीय भाषाओं और बोलियों की पहचान को समझना भी जरूरी है। लोगों तक सरकारी योजनाओं और बैंकिंग सेवाओं की जानकारी उनकी समझ में आने वाली भाषा में पहुंचाने से जागरूकता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। संथाली समेत क्षेत्रीय भाषाओं के प्रति सम्मान और उनके इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने से स्थानीय लोगों का संस्थानों से जुड़ाव भी बेहतर हो सकता है।

विभिन्न बैंकों के अधिकारी और कॉरपोरेट जगत के प्रतिनिधी हुए शामिल (Img: Dynamite News)

कई बैंकों के प्रतिनिधियों की भागीदारी

कार्यक्रम में भारतीय स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, इंडियन बैंक समेत विभिन्न बैंकों और संबंधित संस्थानों के प्रतिनिधियों की भागीदारी रही। ऐसे निरीक्षण के दौरान कार्यालयी पत्राचार, हिंदी में कामकाज, कर्मचारियों के प्रशिक्षण और राजभाषा संबंधी निर्धारित लक्ष्यों की स्थिति जैसे विषय महत्वपूर्ण होते हैं। समिति की समीक्षा प्रक्रिया के जरिए यह समझने का प्रयास किया जाता है कि हिंदी के इस्तेमाल से जुड़े प्रावधानों को लागू करने में संस्थानों की स्थिति कैसी है और कहां सुधार की जरूरत हो सकती है।

हालांकि, देवघर में इन विषयों पर समीक्षा के अंतिम निष्कर्ष और संस्थानों की ओर से उठाए जाने वाले ठोस कदम आगे की कार्यवाही से स्पष्ट होंगे।

दो दिनों तक चलेगा निरीक्षण

यह कार्यक्रम दो दिवसीय है। इसमें छह राज्यों से जुड़े सांसदों की भागीदारी की जानकारी दी गई है। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संस्थानों के राजभाषा संबंधी कामकाज की समीक्षा और हिंदी के प्रभावी इस्तेमाल से जुड़े मुद्दों पर विचार-विमर्श किया जाना है।

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संसदीय राजभाषा समिति का काम सरकारी कामकाज में हिंदी के प्रयोग की प्रगति की समीक्षा करना भी है। इसलिए ऐसे निरीक्षणों का महत्व इस बात से जुड़ा है कि संस्थानों में वास्तविक स्थिति क्या है, किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और सुधार के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

सांसद श्रीरंग अप्पा बारणे के नेतृत्व में समीक्षा

महाराष्ट्र के मावल से लोकसभा सांसद श्रीरंग अप्पा चंदू बारणे संसदीय राजभाषा समिति की तीसरी उप-समिति के संयोजक हैं। देवघर में आयोजित कार्यक्रम में उनकी भूमिका राजभाषा संबंधी निरीक्षण और समीक्षा प्रक्रिया का नेतृत्व करने से जुड़ी है।

Location :  Deoghar

Published :  23 October 2026, 8:06 PM IST