भारतीय डाँक्टरों का कमाल: ऐसी तकनीक बनाई कि पेट की तीन तरह की बीमारियों का पता एक साथ लगेगा

पेट की बीमारियों की पकड़ के लिए चंड़ीगढ़ के विज्ञानिकों ने बनाई ऐसी तकनीक जिससे एक साथ कई बीमारियों की पकड़ हो सके। आइए जानते है वह तकनीक कैसे काम करती है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 22 October 2026, 1:06 PM IST

Chandigarh: भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा तैयार की गई यह नई तकनीक एक Multiplex qPCR डायग्रेस्टिक एसे है, जो पेट के अंदर पैदा करने वाले प्रमुख (Protozoan Disease) की पहचान सिर्फ एक टेस्ट से हो सकती है, जिससे पेट की तीन तरह की बीमारियों का पता एक साथ लगाया जा सकता। 

 यह तकनीक कैसे काम करती है? 

यह तकनीक मल  (stool) के एक ही सैंपल से Giardia lamblia, Cryptosporidium और Amoeba species का एक साथ पता लगा सकती है। इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत है कि एंटअमीबा' कॉम्प्लेक्स के भीतर भी E. histolytica (जो बीमारी फैलाता है) और E. moshkovskii या E. dispar (जो आमतौर पर नुकसान नहीं पहुँचाते) के बीच बारीकी से अंतर बता सकती है।  माइक्रोस्कोपी (Microscopy) जांच में यह अंतर पकड़ना मुमकिन नहीं था।

इस तकनीक के बड़े फायदे

समय की बचत- जहां पहले इन तीनों बीमारियों की अलग-अलग जांच करने में करीब 4 घंटे का समय लगता था, वही अब इस तकनीक के जरिए यह समय घटकर केवल 1.5 घंटे रह गया है। 

पैसे की बचत- मरीजों को अब तीन अलग-अलग टेस्ट के लिए पैसे नहीं देने होंगे। इस मल्टीप्लेक्स ( Multiplex  qPCR) तकनीक के आने से जांच का कुल खर्च आधा हो गया है। 

सटीक इलाज- कई बार पेट में एक से ज्यादा परजीवियों का मिक्स इन्फेक्शन (Mixed Infection) होता है। एक ही बार में सटीक रिपोर्ट मिलने से डॉक्टर बिना किसी शक के तुरंत सही एंटी-पैरासिटिक(Anti- parasitic) दवाएं शुरू कर सकेंगे। 

टेस्ट पास हुआ- इस तकनीक का टेस्ट सैकड़ों मरीजों के सैंपल्स पर किया जा चुका है, जहां इसके परिणाम बेहद अच्छे और सटीक पाए गए हैं।

यह तकनीक भारत जैसे विकासशील देशों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है, जहां दूषित पानी या खराब स्वच्छता के कारण बच्चों और बूढ़ों  में परजीवी संक्रमण (Parasitic Infections) और लंबे समय तक चलने वाले दस्त की समस्या बहुत आम है।

 

Location :  New Delhi

Published :  22 October 2026, 1:06 PM IST