
सिद्धार्थनगर: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने भ्रष्टाचार खत्म करने वाले सरकारी दावों की पोल खोल दी है। वक्फ की जमीन पर कथित रूप से 46 लाख रुपये का मुआवजा लेने के मामले को दबाने के लिए चकबंदी न्यायालय में बिना वादी-प्रतिवादी की उपस्थिति के मुकदमा चलाकर फैसला सुना दिया गया।
पूरी घटना
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के मुताबिक, मामला उस समय शुरू हुआ जब बार्डर डेवलपमेंट रोड के निर्माण के दौरान वक्फ की जमीन पर जालसाजी कर 46 लाख रुपये का मुआवजा लिया गया। शिकायत होने पर प्रशासन ने खानापूर्ति करते हुए रिकवरी की झूठी कवायद शुरू की। इसके साथ ही विभागीय अधिकारियों ने मिलीभगत कर घोटाले को छुपाने की कोशिश की।
चकबंदी कोर्ट में वादी और प्रतिवादी के बिना ही मुकदमा चलाया गया। हैरानी की बात यह है कि जिन लोगों को वादी और प्रतिवादी बनाया गया, उन्हें इस प्रक्रिया की जानकारी तक नहीं दी गई।
वादी का आरोप
फर्जी तरीके से वादी बनाए गए अहमदुल्लाह ने जब इस मामले की शिकायत की, तो जांच का खेल एक बार फिर शुरू हुआ। अब तक पूरे प्रकरण को दबाने की कोशिश की जा रही है। अहमदुल्लाह का आरोप है कि प्रशासन और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से साजिश रची गई है।
जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर ने बताया कि यह मामला पहली बार उनके संज्ञान में आया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए गहराई से परीक्षण का आदेश दिया गया है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया है।
वक्फ संपत्ति विवाद में बढ़ा सवाल
इस घटना ने वक्फ संपत्ति से जुड़े विवादों और उनके प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बिना जानकारी के वादी-प्रतिवादी बनाए जाने और चकबंदी कोर्ट के फैसले से यह साफ है कि भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए किसी भी हद तक जाया जा सकता है।
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Published : 31 December 2024, 2:34 PM IST
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