
लखनऊ: राज्य में अब नई दुग्ध नीति लागू होने वाली हैं। इस नई नीति के तहत सरकार दुग्ध विकास विभाग में पूंजी निवेश पर काफी जोर देगी। इसके लिए सरकार विभाग नीतियों को लचीला बनाते हुए रियायतों का पिटारा खेलेगी, ताकी निवेशक दुग्ध विकास विभाग के प्रोडक्ट क्षेत्र में ज्याद से ज्यादा पूंजी निवेश का कर सके।
विभाग की नई दुग्ध नीति के प्ररूप का आधार वन ट्रिलियन डालर की इकोनामी को केंद्र में रखकर बुना जा रहा है। जून 2018 में विभाग की वर्तमान नीति लाई गई थी, जिसे 2023 में 5 साल पूरे हो जाएंगे।
हाल ही में पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव रजनीश दुबे की अध्यक्षता में नई दुग्ध नीति को लेकर पहली बैठक हुई थी, जिसमें स्टेक होल्डर के सुझाव लिए गए थे। नई नीति को लेकर व्यवहारिकता के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए लोगों के सुझाव लिए जा रहे हैं।
बताया जा रहा है कि, नई दुग्ध नीति अपनी वर्तमान नीति का ही बेहतर स्वरूप होगी। जिसमें दुग्ध उत्पादकों, रोजगार और नई प्रसंस्करण इकाईयों की स्थापना पर जोर दिया जाएगा।
सरकार खोलेगी रियायतों का पिटारा
नई नीति की स्थापना में पूंजीगत निवेश अनुदान और ब्याज में छूट के दायरे को बढ़ाया जाएगा। मौजूदा नीति में प्लांट की स्थापना के काम में लगी लागत का 25 प्रतिशत अनुदान के रूप में दिया जा रहा है। इसमें 10-15 प्रतिशत की बढ़ोंती की जा सकती है।
Published : 24 August 2022, 2:58 PM IST
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