
हिसार (हरियाणा): राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिकों ने भ्रूण स्थानांतरण प्रौद्योगिकी का उपयोग करके मारवाड़ी घोड़े की बछेड़ी (घोड़े की बच्ची) पैदा की है। यह इस तरह का पहला मामला है।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार, भ्रूण स्थानांतरण प्रौद्योगिकी में ब्लास्टोसिस्ट अवस्था (गर्भाधान के 7.5 दिन बाद) में एक निषेचित भ्रूण को दाता घोड़ी से एकत्र किया गया और सरोगेट की सहायता से मां को सफलतापूर्वक स्थानांतरित कर दिया गया।
केंद्र के निदेशक डॉ. टी के भट्टाचार्य ने बताया कि 19 मई को सरोगेट मां ने एक स्वस्थ बछेड़ी को जन्म दिया, जिसका नाम 'राज-प्रथमा' रखा गया।
उन्होंने कहा कि इस बछेड़ी का वजन 23 किलोग्राम है।
Published : 21 May 2023, 4:15 PM IST
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