
नयी दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को उस याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया जिसमें दावा किया गया था कि फिल्म ‘आंख मिचौली’ दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों का उल्लंघन करती है और विभिन्न अक्षमताओं से पीड़ित पात्रों को 'बेहद अपमानजनक और असंवेदनशील तरीके' से चित्रित करती है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मनमीत पीएस अरोड़ा की पीठ ने कहा कि सिनेमाई काम में काफी स्वतंत्रता दी जाती है और एक बार जब केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) किसी फिल्म को प्रमाणपत्र दे देता है तो अदालतें आम तौर पर हस्तक्षेप नहीं करती हैं।
पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा, ‘‘हम बहुत अधिक सेंसरशिप नहीं चाहते हैं। हम उन कुछ देशों में से एक हैं जहां पूर्ववर्ती सेंसरशिप है। हम एक ऐसा देश हैं जहां फिल्म के प्रदर्शन से पहले दृश्य हटा दिए जाते हैं।’’
उच्च न्यायालय ने कहा कि रचनात्मक स्वतंत्रता को संजोया जाना चाहिए और हालांकि कुछ चीजें बेहद अपमानजनक हो सकती हैं, लेकिन सामाजिक बुराइयों से यह दिखाकर निपटा जा सकता है कि वे मौजूद हैं।’’
याचिकाकर्ता निपुन मल्होत्रा एक दिव्यांग हैं और उन्होंने याचिका में कहा कि फिल्म दिव्यांग लोगों के कई वर्गों के अधिकारों का अपमान और उल्लंघन करती है, जिनमें बोलने, देखने और सुनने में अक्षम लोग भी शामिल हैं।
डाइनामाइट न्यूज़ संवाददाता के अनुसार याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई ने दलील दी कि यह दिव्यांगों को बेहद परेशान करने वाला चित्रण है, जो न केवल स्थापित सामाजिक मानदंडों बल्कि दिव्यांगों के अधिकारों और सम्मान की रक्षा करने वाले कानूनी प्रावधानों का भी उल्लंघन करता है।
याचिका में कहा गया कि फिल्म में ऐसे दृश्य और चरित्र-चित्रण शामिल हैं जो न केवल आपत्तिजनक हैं बल्कि हानिकारक रूढ़िवादिता को थोपते हैं।
परेश रावल, अभिमन्यु दसानी और मृणाल ठाकुर की भूमिका वाली यह फिल्म तीन नवंबर, 2023 को रिलीज़ हुई थी।
Published : 15 January 2024, 3:51 PM IST
Topics : Aankh Michauli court film petition अदालत आंख मिचौली इनकार फिल्म याचिका