
वीरेंद्र सहवाग ने फिर जो समझाया (IMG: X)
New Delhi: क्रिकेट के मैदान पर गेंदबाजों के छक्के छुड़ाने वाले वीरेंद्र सहवाग अब अपने बेटों को जिंदगी की असली पिच पर खेलने के गुर सिखा रहे हैं। टीम इंडिया के पूर्व विस्फोटक ओपनर ने अपने बच्चों को समझाया है कि जिंदगी में कामयाबी का मतलब महंगी गाड़ियों में घूमना, लग्जरी घड़ियां पहनना या पैसों का दिखावा करना नहीं है। इसके लिए मेहनत करनी पड़ती है और अपनी कमाई की अहमियत भी समझनी होती है। सहवाग की यह सीख तब चर्चा में आई, जब उनके एक बेटे को कार में पेट्रोल भरवाने के बाद 7,000 रुपये का बिल चुकाना पड़ा। रकम देखकर बेटा हैरान रह गया।
वीरेंद्र सहवाग ने डिजिटल क्रिएटर नेहा बेदी के शो 'द लाइफ सेवर्स शो' में बातचीत के दौरान अपने बेटों की परवरिश और पैसों को लेकर उनकी सोच पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि उनके दोनों बेटे क्रिकेट खेल रहे हैं और इस खेल के जरिए कमाई भी करने लगे हैं। एक बेटा अंडर-16 स्तर पर खेलता है, जबकि दूसरा अंडर-19 क्रिकेट में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है। सहवाग ने बताया कि उनके बेटे करीब दो से तीन लाख रुपये तक कमा रहे हैं। इसी दौरान एक बार उनके बेटे ने कार में पेट्रोल भरवाया और बिल 7,000 रुपये आया। इतनी रकम खर्च होते देखकर वह हैरान रह गया।
सहवाग ने माना कि उनके बेटे भी आज की पीढ़ी के दूसरे युवाओं की तरह महंगी गाड़ियों और लग्जरी चीजों की तरफ आकर्षित होते हैं। उन्हें BMW और रेंज रोवर जैसी गाड़ियों में घूमना अच्छा लगता है। इतना ही नहीं, उनका एक बेटा अपने पिता की घड़ियां भी मांगकर पहनता है। सहवाग ने इस व्यवहार को बच्चों की उम्र और उनकी स्वाभाविक इच्छाओं से जोड़कर देखा। उनके मुताबिक, कम उम्र में भौतिक चीजों की तरफ आकर्षित होना असामान्य नहीं है। बच्चे अपने आसपास की दुनिया देखते हैं और उसी के आधार पर उनकी पसंद विकसित होती है।
सहवाग की पूरी सीख का सार यही है कि इंसान को दिखावे के बजाय अपनी वास्तविक उपलब्धियों पर ध्यान देना चाहिए। उनके लिए लग्जरी कार या महंगी घड़ी से ज्यादा मायने उस काम के हैं, जिसे देखकर लोग उसकी मेहनत और काबिलियत की तारीफ करें। वह चाहते हैं कि उनके बेटे अपनी जिंदगी में ऐसे मुकाम हासिल करें, जिनके लिए उन्हें किसी मशहूर उपनाम या पारिवारिक संपत्ति के सहारे की जरूरत न पड़े। उनके मुताबिक, भौतिक सुख-सुविधाओं की चाहत अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन जब यही चीजें सफलता का पैमाना बन जाती हैं, तब परेशानी शुरू होती है।
वीरेंद्र सहवाग भारतीय क्रिकेट के उन खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं, जिन्होंने अपनी आक्रामक बल्लेबाजी से दुनिया भर में पहचान बनाई। ऐसे में उनके बेटों के सामने क्रिकेट करियर बनाते समय एक अलग चुनौती भी होगी। उन्हें न केवल अपने प्रदर्शन से खुद को साबित करना होगा, बल्कि लोगों की तुलना और उम्मीदों का भी सामना करना पड़ेगा।सहवाग के बेटे आर्यवीर और वेदांत क्रिकेट में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। पिता के अनुभव का लाभ उन्हें जरूर मिल सकता है, लेकिन मैदान पर प्रदर्शन उन्हें खुद करना होगा।
क्रिकेट जैसे प्रतिस्पर्धी खेल में प्रतिभा के साथ धैर्य, अनुशासन और लगातार बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता भी मायने रखती है। किसी बड़े खिलाड़ी के बेटे होने से शुरुआती पहचान मिल सकती है, लेकिन लंबे समय तक टिके रहने के लिए अपनी काबिलियत साबित करनी पड़ती है। सहवाग की सलाह भी इसी सोच पर आधारित है। वह चाहते हैं कि उनके बेटे आलोचना को अपने ऊपर हावी न होने दें और अपनी गलतियों से सीखते हुए आगे बढ़ें। उनके लिए यह जरूरी है कि दोनों अपनी अलग पहचान बनाएं और अपने प्रदर्शन से लोगों का भरोसा जीतें।
Location : New Delhi
Published : 22 October 2026, 12:28 PM IST