
घर के दरवाजों का वास्तु महत्व (Img- Internet)
New Delhi: घर का दरवाजा सिर्फ आने-जाने का साधन नहीं होता, बल्कि वास्तु शास्त्र के अनुसार इसे ऊर्जा का मुख्य द्वार माना गया है। मान्यता है कि घर के अलग-अलग दरवाजों पर देवी-देवताओं का वास होता है, जो घर की सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा को प्रभावित करते हैं। इसलिए दरवाजों की पवित्रता और सही उपयोग का विशेष महत्व बताया गया है।
वास्तु मान्यताओं के अनुसार रसोई घर के दरवाजे पर माता अन्नपूर्णा का वास माना जाता है। माता अन्नपूर्णा को अन्न और समृद्धि की देवी कहा गया है। कहा जाता है कि यदि रसोई के दरवाजे का सम्मानपूर्वक उपयोग किया जाए और उसकी शुद्धता बनाए रखी जाए तो घर में भोजन की कभी कमी नहीं होती और बरकत बनी रहती है। लेकिन यदि दरवाजे पर गंदगी या अनुचित वस्तुएं रखी जाएं तो इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
घर के स्वामी या मुखिया के बेडरूम के दरवाजे को माता महालक्ष्मी का स्थान माना जाता है। मान्यता है कि माता महालक्ष्मी घर के मुखिया की रक्षा करती हैं और उनके धन, वैभव तथा समृद्धि को सुरक्षित रखती हैं। इसलिए बेडरूम के दरवाजे को साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखना अत्यंत आवश्यक माना गया है। यहां भी किसी प्रकार की अव्यवस्था या कपड़े टांगने को अशुभ माना जाता है।
Vastu Shastra: इन संकेतों से जानें घर में कहां है वास्तु असंतुलन, वरना बढ़ सकती हैं परेशानियां
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के किसी भी दरवाजे पर कपड़े, तौलिया या अन्य वस्तुएं टांगना अशुभ माना गया है। ऐसा करने से घर की सकारात्मक ऊर्जा प्रभावित होती है और जीवन में बाधाएं आने लगती हैं। कई बार लोग अनजाने में दरवाजों पर वस्तुएं लटका देते हैं, जिससे घर का संतुलन बिगड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार दरवाजे को पैर से खोलना या बंद करना भी अपमानजनक माना जाता है। इससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश बढ़ सकता है और जीवन में छोटी-छोटी समस्याएं बड़ी बाधाओं में बदल सकती हैं। दरवाजों को सम्मानपूर्वक हाथ से खोलना और बंद करना चाहिए।
यदि घर के दरवाजों की साफ-सफाई और पवित्रता का ध्यान रखा जाए तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार बना रहता है। इससे परिवार में सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि बनी रहती है। वास्तु के इन छोटे-छोटे नियमों का पालन जीवन को संतुलित और सुखमय बना सकता है।
Location : New Delhi
Published : 1 May 2026, 2:01 PM IST