Navratri 2026: नवरात्रि में दरवाजे पर तोरण और स्वास्तिक बनाने की परंपरा क्यों निभाते हैं लोग, जानिए इसके पीछे की मान्यता

Navratri Vastu Tips: नवरात्रि में मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण और हल्दी-कुमकुम से स्वास्तिक बनाने की परंपरा है। जानिए इन शुभ प्रतीकों का धार्मिक महत्व और घर के प्रवेश द्वार को सजाने के आसान तरीके।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 16 October 2026, 1:39 PM IST

New Delhi: नवरात्रि का पर्व आते ही घरों में पूजा-पाठ और सजावट की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस दौरान मां दुर्गा के स्वागत के लिए घर के मुख्य द्वार को विशेष रूप से सजाया जाता है। कई घरों में दरवाजे पर आम या अशोक के पत्तों का तोरण लगाया जाता है और हल्दी, कुमकुम या रोली से स्वास्तिक बनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं और वास्तु परंपराओं में इन प्रतीकों को शुभता, समृद्धि और सकारात्मकता से जोड़कर देखा जाता है।

आम और अशोक के पत्तों के तोरण का महत्व

भारतीय परंपरा में मुख्य द्वार पर तोरण लगाने की प्रथा काफी पुरानी है। आम के पत्तों और अशोक के पत्तों से बने तोरण को शुभ अवसरों पर घर के प्रवेश द्वार पर लगाया जाता है। नवरात्रि जैसे धार्मिक पर्व पर इसे मां दुर्गा के स्वागत और घर में मंगल भाव बनाए रखने का प्रतीक माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हरे पत्ते जीवन, ताजगी और प्रकृति से जुड़ाव का संदेश देते हैं। तोरण से मुख्य द्वार की सुंदरता भी बढ़ती है और घर में उत्सव जैसा माहौल बनता है। हालांकि, इसके आध्यात्मिक प्रभावों को धार्मिक विश्वास के रूप में ही समझना चाहिए।

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घर में सकारात्मक माहौल से जुड़ी मान्यता

वास्तु परंपरा में घर के मुख्य द्वार को विशेष महत्व दिया जाता है। इसे घर में प्रवेश का प्रमुख स्थान माना जाता है, इसलिए इसकी साफ-सफाई और सजावट पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है। पत्तों का तोरण लगाने से प्रवेश द्वार हरा-भरा और आकर्षक दिखाई देता है।

प्राकृतिक पत्तों की ताजगी और उनकी हल्की सुगंध आसपास के वातावरण को सुखद बना सकती है। इसी वजह से नवरात्रि में कई लोग घर के प्रवेश द्वार को पारंपरिक तरीके से सजाना पसंद करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से घर में शुभता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीकात्मक स्वागत होता है।

मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाने की परंपरा

नवरात्रि के दौरान घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक बनाना भी कई परिवारों की धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। इसे आमतौर पर रोली, हल्दी या कुमकुम से बनाया जाता है। हिंदू परंपरा में स्वास्तिक को मंगल, कल्याण और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।

धार्मिक विश्वास के अनुसार, स्वास्तिक बनाने से घर में शुभता का भाव बना रहता है। इसे श्रद्धा और विश्वास के साथ बनाया जाता है। कई लोग पूजा की शुरुआत में या किसी शुभ अवसर पर इसे मुख्य द्वार और पूजा स्थल के पास बनाते हैं।

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तोरण और स्वास्तिक लगाते समय किन बातों का रखें ध्यान?

नवरात्रि में तोरण लगाते समय मुख्य द्वार को साफ रखें और पत्तों को ताजा रखने का प्रयास करें। स्वास्तिक बनाते समय उसके पारंपरिक स्वरूप और धार्मिक महत्व का सम्मान करें। सजावट ऐसी होनी चाहिए जिससे दरवाजे के खुलने-बंद होने में परेशानी न आए।

नवरात्रि में तोरण और स्वास्तिक लगाने की परंपरा केवल सजावट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह श्रद्धा, मंगलकामना और उत्सव के भाव से भी जुड़ी है। अपनी पारिवारिक परंपरा और आस्था के अनुसार इन प्रतीकों को अपनाकर घर में पर्व का स्वागत किया जा सकता है।

Location :  New Delhi

Published :  16 October 2026, 1:39 PM IST