पंजाब विधानसभा में अचानक गरमाया माहौल, सीएम और विपक्ष के बीच क्यों बढ़ी टकराव की आग?

मजदूर दिवस के मौके पर पंजाब सरकार द्वारा बुलाया गया विधानसभा का विशेष सत्र राजनीतिक बहस और हंगामे का केंद्र बन गया। विपक्ष ने सत्र की प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जबकि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। सदन के भीतर आरोप-प्रत्यारोप, नारेबाजी और वॉकआउट ने माहौल को पूरी तरह राजनीतिक रंग दे दिया।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 1 May 2026, 2:03 PM IST

Chandigarh : मजदूर दिवस के अवसर पर पंजाब सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर श्रमिकों के मुद्दों को प्राथमिकता देने का संदेश देने की कोशिश की। सत्र शुरू होते ही राजनीतिक तकरार ने माहौल बदल दिया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। सदन में मजदूरों के अधिकारों और कल्याण पर चर्चा से ज्यादा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप हावी रहे। विपक्ष ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए तो सरकार ने विशेष सत्र की जरूरत और उपलब्धियों का बचाव किया।

विपक्ष ने उठाए सवाल

नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा ने विधानसभा में बोलते हुए कहा कि बार-बार विशेष सत्र बुलाने की बजाय नियमित सत्र आयोजित किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि विशेष सत्रों का कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आता। आरोप लगाया कि अब तक कई सत्र आयोजित हो चुके हैं। विधायकों को अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका नहीं दिया गया।

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बाजवा ने कहा कि सदन में प्रश्नकाल और शून्यकाल जैसे जरूरी हिस्सों को शामिल नहीं किया जा रहा। जिससे जनहित के मुद्दे पीछे छूट रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर खुलकर चर्चा होनी चाहिए। सीमित समय के कारण विपक्ष अपनी भूमिका ठीक से निभा नहीं पा रहा।

सीएम भगवंत मान का जवाब

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि विशेष सत्र पर सवाल उठाना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि पहले भी विशेष सत्रों के दौरान महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए हैं। सीएम ने दावा किया कि सरकार जनता से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से काम कर रही है और आगामी मानसून सत्र में सभी विधायकों को पर्याप्त समय दिया जाएगा।

सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा के मोबाइल इस्तेमाल को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया। मुख्यमंत्री ने इस पर आपत्ति जताई और कहा कि मजदूर दिवस जैसे गंभीर मौके पर सदन की गरिमा बनाए रखना जरूरी है। इस टिप्पणी के बाद सदन में बहस तेज हो गई।

आरोप, नारेबाजी और वॉकआउट से गरमाया माहौल

सदन का माहौल उस समय और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया जब कांग्रेस विधायकों ने मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए। विपक्ष की ओर से कहा गया कि मुख्यमंत्री शराब के प्रभाव में सदन में पहुंचे हैं। इस आरोप के बाद सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।

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प्रताप बाजवा ने कहा कि ऐसे आरोप गंभीर हैं और निष्पक्षता के लिए सभी सदस्यों का परीक्षण कराया जाना चाहिए। इसके बाद कांग्रेस विधायक नारेबाजी करते हुए सदन के बीच पहुंच गए। आप विधायकों ने इसका विरोध किया और दोनों पक्षों के बीच बहस बढ़ गई।

Location :  Chandigarh

Published :  1 May 2026, 2:03 PM IST