बच्चे अक्सर अपनी परेशानी शब्दों में नहीं बताते, बल्कि व्यवहार के जरिए जाहिर करते हैं। अगर बच्चा अकेले रहना पसंद करने लगा है, चिड़चिड़ा हो गया है या चुप रहने लगा है, तो यह मानसिक तनाव का संकेत हो सकता है। समय पर समझ और प्यार बेहद जरूरी है।

अगर बच्चा अचानक अकेले रहना पसंद करने लगे, तो इसे उसकी आदत मानकर नजरअंदाज न करें। बाल मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि यह भावनात्मक तनाव, डर या आत्मविश्वास की कमी का संकेत हो सकता है। यह माता-पिता से दूरी नहीं, बल्कि समझ और सहारे की जरूरत का इशारा है।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)
बिना वजह खुश या अचानक गुस्सा, चिड़चिड़ापन और रोना बच्चे के मन में चल रही उथल-पुथल को दिखाता है। बच्चे अपनी भावनाएं शब्दों में नहीं कह पाते, इसलिए उनका असर व्यवहार में दिखता है। ऐसे में डांटने की बजाय बच्चे की बात सुनना ज्यादा जरूरी होता है।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)
नींद न आना, डरावने सपने, ज्यादा सोना या पढ़ाई में ध्यान न लगना मानसिक दबाव का संकेत हो सकता है। कई बार भावनात्मक परेशानी की वजह से बच्चा पढ़ाई में कमजोर होने लगता है। इसे आलस्य न समझें, बल्कि बच्चे के मन की स्थिति समझने की कोशिश करें।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)
बार-बार गुस्सा करना, चिल्लाना या मारपीट करना भावनाओं को व्यक्त न कर पाने का तरीका हो सकता है। वहीं बिना किसी मेडिकल कारण के सिर या पेट दर्द की शिकायत भी मानसिक तनाव से जुड़ी हो सकती है। ऐसे में बच्चे को सुरक्षित माहौल और भावनात्मक सहारा देना जरूरी है।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)
अगर बच्चा सवाल पूछने पर चुप हो जाए, हर बात में डर महसूस करे या खुद पर भरोसा न करे, तो यह भावनात्मक असुरक्षा का संकेत है। बच्चे को यह भरोसा दिलाना जरूरी है कि वह अकेला नहीं है और बिना डरे अपनी बात रख सकता है।(फोटो सोर्स- इंटरनेट)