Research: बढ़ते तापमान से नहीं चेते तो गेहूं की रोटी भी नही होगी हजम!

गर्मी के कारण गेहूं की गुणवत्ता में बदलाव आइे जानते है इससे होने वाले प्रभाव का असर। लेकिन तापमान बढ़ोत्तरी गेहूं की गुणवत्ता, पैदावार और पोषण पर असर डालती है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 21 October 2026, 10:41 AM IST

New Delhi: देश में लगातार बढ़ते तापमान और बदलते मौसम का असर अब हमारी थाली तक पहुंचने की आशंका है। गेहूं भारत के खाद्य पदार्थों में से एक है और करोड़ों लोगों की थाली का अहम हिस्सा है।

लेकिन तापमान बढ़ोत्तरी गेहूं की गुणवत्ता, पैदावार और पोषण पर असर डालती है। इसका सीधा प्रभाव आम लोगों को की थैली और आमदनी पर पड़ता है।

गर्मी से गेहूं की फसल को नुकसान

एक अध्ययन के अनुसार बढ़ते तापमान से कार्बन डाइआक्साइड ( co2) बढ़ रही है, जिसमें गेहूं और अन्य खाघ पदर्थो की संरचना मे बदलाव हो सकता है। जर्मनी की एक युनिवर्सिटी की सबरीना गाइस्लिट्स का कहना है कि बढ़ती गर्मी से गेहूं की संरचना मे बदलाव की सीमा काफी हद तक गेहूं की किस्म पर निर्भर करेगी। शोध के अनुसार गेहूं की 10 किस्मों को जांचा गया। अलग-अलग साद्रता में जब गेूंहू बोए गए और जब फसल काटी गई तो उसमे अंतर पाया गया। Co2 के बढ़े स्तर मे पैदा किए गए गेहूं मे Amylase इंहिबिट ( inhibit) की मात्रा बढ़ गई है। बताया गया है कि फसल मे वैश्विक स्तर पर Co2 का स्तर 44 साल मे 25 प्रतिशत बढ़ गया है। अनुमान जताया गया है कि 2050 तक co2 का स्तर 600 पीपीएम तक पहुंच सकता हैं, जबकि 1980 मे 340 पार्ट प्रति मिलियन था जबकि 2024 में बढ़कर 425 पीपीएम हो गया  इसका मतलब है कि भविष्य में गेहूं अधिक साद्रता मे पैदा होगा, जिससे उसके प्रोटीन संरचना मे बदलाव संभव है।

गेहूं की गुणवत्ता पर भी असर

विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक तापमान गेहूं में मौजूद प्रोटीन, स्टार्च और अन्य पोषक तत्वो को प्रभावित करता है। हालांकि इसका असर तापमान, गेहूं की किस्म, मिट्टी और खेती के तरीकों पर निर्भर करता है। यदि गेहूं की गुणवत्ता पर और पोषण में बदलाव आता है, तो खाघ सुरक्षा और लोगों के पोषण पर इसका असर पड़ सकता है। गेहूं से बनने वाली रोटी भारतीय भोजन का अहम हिस्सा है, इसलिए इसकी गुणवत्ता बनाए रखना जरुरी हैं।

किसानों और सरकार के सामने नई चुनौती

बढ़ती गर्मी से निपटने के लिए कृषि वैज्ञानिक ऐसी गेहूं की किस्में विकसित करने पर जोर दे रहे हैं, जो अधिक तापमान सहन कर सके। किसानों को सही समय पर बुआई करने, मिट्टी की जरुरत के अनुसार खाद देने और उचित सिंचाई की सलाह दी जाती है। भारतीय कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार गर्मी और सूखे के प्रभाव से गेहूं की पैदावार और दानों के वजन में भी कमी देखी गई।

भोजन की सुरक्षा के लिए जरुरी कदम

गेहूं की पैदावार में कमी आने पर बाजार मे इसकी उपलब्धता और कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। इसलिए जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए किसानों को, आधुनिक तकनीक और मौसम की जानकारी और पानी को बचाने के उपाय अपनाने होगें। सरकार और संस्थानो को भी किसानों तक नई तकनीक पहुंचानी होगी।

Location :  New Delhi

Published :  21 October 2026, 10:41 AM IST