दीपेंद्र गोयल के इस्तीफे के बाद जोमैटो में नई कमान अब अलबिंदर ढिंडसा के हाथ में है। Blinkit (पूर्व Grofers) के सह-संस्थापक और लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट अलबिंदर ने भारतीय क्विक-कॉमर्स को नई दिशा दी है। उनके करियर और जोमैटो में आने की कहानी यहां पढ़ें।

Albinder Dhindsa
New Delhi: बुधवार को जोमैटो के ऑफिस में हलचल मची, क्योंकि दीपेंद्र गोयल ने अचानक इस्तीफा दे दिया। अब जोमैटो की कमान संभाल रहे हैं Blinkit के सह-संस्थापक और CEO अलबिंदर ढिंडसा।
अलबिंदर ढिंडसा की शुरुआत
अलबिंदर ढिंडसा का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं। पंजाब के पटियाला से आईआईटी दिल्ली तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अमेरिका के कोलंबिया बिजनेस स्कूल से MBA किया। वहीं उन्होंने UBS Investment Bank में काम किया और ग्लोबल कॉरपोरेट दुनिया की समझ बनाई। इसके बाद भारत लौटकर उन्होंने अपने करियर की सबसे बड़ी शुरुआत की। वर्ष 2013 में उन्होंने सौरभ कुमार के साथ मिलकर Grofers की स्थापना की थी, जिसको अब Blinkit के नाम से जानते हैं।
Grofers से Blinkit तक का सफर
वर्ष 2013 में स्थापित Grofers एक ग्रॉसरी डिलीवरी प्लेटफॉर्म के रूप में उभरी। साल 2021 में कंपनी का नाम Blinkit रखा गया और ‘10 मिनट डिलीवरी’ मॉडल पर फोकस किया गया। अलबिंदर ने Dark Stores मॉडल को भारतीय बाजार में प्रभावी तरीके से लागू किया, जिससे त्वरित सामान डिलीवरी संभव हुई। उनके इस मॉडल ने क्विक-कॉमर्स को भारत में नई पहचान दी।
जोमैटो के साथ विलय और नई भूमिका
साल 2022 में जोमैटो ने Blinkit का अधिग्रहण कर लिया। तब से अलबिंदर इस यूनिट के हेड रहे और अब पूरी कंपनी की जिम्मेदारी उनके हाथ में है। बिजनेस जगत में इसे बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि जोमैटो के कुल कारोबार का यह हिस्सा काफी मजबूत और सफल है।
अलबिंदर को लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन का एक्सपर्ट माना जाता है। उनकी सोच और प्रबंधन क्षमता ने Blinkit को सफलता की ऊंचाई तक पहुंचाया। इंटरेस्टिंग बात ये है कि अलबिंदर और दीपेंद्र दोनों IIT दिल्ली के पूर्व छात्र और पुराने दोस्त हैं, और Blinkit अब पूरी तरह जोमैटो साम्राज्य का हिस्सा बन चुका है।