RBI Repo Rate Hike: रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी, Home और Car Loan होगा महंगा?

RBI ने 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी के साथ Repo Rate को 5.50 फीसदी कर दिया है। फरवरी 2023 के बाद यह पहली दर बढ़ोतरी है। बढ़ती महंगाई, महंगे क्रूड और वैश्विक आर्थिक दबाव के बीच लिया गया यह फैसला Home Loan, EMI, FD और शेयर बाजार पर असर डाल सकता है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 7 October 2026, 11:11 AM IST

New Delhi: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महंगाई और बढ़ती वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच बड़ा फैसला लिया है। RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 फीसदी कर दिया है। यह फरवरी 2023 के बाद पहली बार है जब केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर बढ़ाई है।

चार साल बाद बढ़ा Repo Rate

RBI ने इससे पहले लगातार चार मौद्रिक नीति बैठकों में रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा था। अब इसमें 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। MPC के सभी सदस्यों ने इस फैसले के पक्ष में मतदान किया।

फरवरी 2023 में RBI ने रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 6.50 फीसदी किया था। इसके बाद दरों में बदलाव के दौर में कटौती भी हुई और दिसंबर 2025 से रेपो रेट 5.25 फीसदी पर बना हुआ था।

RBI ने क्यों बढ़ाई ब्याज दर?

इस फैसले के पीछे बढ़ती महंगाई एक बड़ी वजह मानी जा रही है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, खाद्य कीमतों का दबाव और कमजोर मानसून से जुड़ी चिंताओं ने महंगाई के जोखिम को बढ़ाया है।

इसके अलावा वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, डॉलर की मजबूती और भू-राजनीतिक तनाव का असर भी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। RBI का यह कदम कीमतों पर बढ़ते दबाव को नियंत्रित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

Home Loan और EMI पर क्या होगा असर?

रेपो रेट बढ़ने का सीधा असर बैंकों की उधारी लागत पर पड़ सकता है। अगर बैंक अपने लेंडिंग रेट बढ़ाते हैं तो फ्लोटिंग रेट वाले होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ब्याज दरों में बढ़ोतरी हो सकती है।

इसका मतलब है कि आने वाले समय में कुछ कर्जदारों की EMI बढ़ सकती है। हालांकि, वास्तविक असर बैंक के बेंचमार्क, लोन के प्रकार और बैंक द्वारा दरों में किए गए बदलाव पर निर्भर करेगा।

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FD और बचत पर भी पड़ेगा असर

रेपो रेट में बढ़ोतरी का असर केवल कर्ज लेने वालों तक सीमित नहीं रहता। बैंक अपनी ब्याज दरों की संरचना में बदलाव कर सकते हैं। ऐसे में फिक्स्ड डिपॉजिट और दूसरी जमा योजनाओं पर मिलने वाली ब्याज दरों में भी बदलाव की संभावना रहती है।

यानी एक तरफ लोन महंगा हो सकता है, वहीं दूसरी तरफ कुछ जमाकर्ताओं को ज्यादा ब्याज मिलने का फायदा भी मिल सकता है।

Stock Market और Rupee पर नजर

RBI के फैसले से पहले ही शेयर बाजार में बैंकिंग, ऑटो, रियल्टी और अन्य रेट-सेंसिटिव सेक्टरों पर दबाव देखा गया। अब बाजार की नजर RBI के आगे के रुख पर रहेगी। खासकर महंगाई, ब्याज दरों और लिक्विडिटी को लेकर केंद्रीय बैंक का संकेत निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण होगा।

RBI के इस फैसले ने करीब चार साल बाद ब्याज दर बढ़ाने का सिलसिला फिर शुरू किया है। आगे दरों को लेकर केंद्रीय बैंक का रुख महंगाई और आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

Location :  New Delhi

Published :  7 October 2026, 10:52 AM IST