
प्रतीकात्मक छवि (Img: Google)
New Delhi, (Supreme Court Benami Property Verdict) : अगर आपने किसी ड्राइवर, नौकर, रिश्तेदार या किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर संपत्ति खरीदी है तो अब ठहर जाइए, वरना ऐसा करना आपको महंगा पड़ सकता है। आप कंगाल तक हो सकते हैं। क्योंकि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा फैसला सुनाया जिससे आपकी संपत्ती जप्त हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में साफ कर दिया है कि बेनामी लेन-देन के जरिए छिपाई गई संपत्तियों को सरकार जब्त कर सकती है, भले ही वे 2016 से पहले ही क्यों न खरीदी गई हों।
उच्चतम न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि बेनामी संपत्ति (Prohibition) संशोधन अधिनियम, 2016 का क्रियान्वयन केवल आगे के मामलों तक सीमित नहीं रहेगा। इसके तहत 2016 से पहले किए गए संदिग्ध लेन-देन भी जांच के दायरे में आएंगे और जरूरत पड़ने पर उनकी जब्ती की जा सकती है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि कई लोग बेनामी संपत्ति को वैध दिखाने के लिए वसीयत या उत्तराधिकार का सहारा लेते थे, लेकिन अब ऐसे सभी प्रयासों पर रोक लगाई जाएगी। यदि संपत्ति का मूल स्रोत बेनामी पाया जाता है, तो उसे वसीयत के जरिए भी वैध नहीं माना जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 2016 से पहले के मामलों में:
जबकि 2016 के बाद के मामलों में सख्त प्रावधान लागू हैं, जिसमें 7 साल तक की जेल और जुर्माना भी शामिल है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से आयकर विभाग को पुराने संदिग्ध मामलों की जांच करने की शक्ति मिल गई है। अब केवल दस्तावेज नहीं, बल्कि संपत्ति के वास्तविक स्रोत और मालिकाना हक की गहराई से जांच होगी। इससे काले धन को छिपाने वालों पर बड़ा असर पड़ेगा।
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यह मामला मंजुला और अन्य बनाम डी. ए. श्रीनिवास से जुड़ा है, जिसमें वसीयत के आधार पर संपत्ति का दावा किया गया था। जांच में पाया गया कि संपत्ति बेनामी तरीके से खरीदी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस दावे को खारिज करते हुए सरकार को 8 हफ्तों के भीतर संपत्ति कब्जे में लेने का आदेश दिया।
इस फैसले के बाद अब यह साफ हो गया है कि बेनामी संपत्तियों के जरिए काला धन छिपाना आसान नहीं रहेगा। सरकार किसी भी समय ऐसी संपत्तियों को जब्त कर सकती है, जिससे देश में वित्तीय पारदर्शिता को और मजबूती मिलेगी।
Location : New Delhi
Published : 11 May 2026, 10:39 AM IST
Topics : Benami Transactions Act 2016 retrospective Black money crackdown Income Tax department property seizure Supreme Court Benami property verdict