ईरान में जारी राजनीतिक और सामाजिक अशांति का सीधा असर अब भारतीय बासमती चावल के निर्यात और घरेलू बाजार पर दिखने लगा है। बीते एक सप्ताह में बासमती चावल की कीमतों में 5 से 7 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट दर्ज की गई है।

भारतीय बासमती चावल के निर्यात और घरेलू बाजार पर पड़ा असर
New Delhi: ईरान में जारी राजनीतिक और सामाजिक अशांति का सीधा असर अब भारतीय बासमती चावल के निर्यात और घरेलू बाजार पर दिखने लगा है। बीते एक सप्ताह में बासमती चावल की कीमतों में 5 से 7 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट दर्ज की गई है। ईरान को निर्यात प्रभावित होने, भुगतान में देरी और जोखिम बढ़ने से भारतीय निर्यातकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) के अनुसार, ईरान में नागरिक अशांति और व्यापारिक अस्थिरता के चलते भारतीय बासमती चावल की मांग कमजोर पड़ी है। इसका असर घरेलू बाजार पर पड़ा है, जहां प्रमुख किस्मों के दामों में तेज गिरावट देखी जा रही है। फेडरेशन का कहना है कि बीते सप्ताह ज्यादातर बासमती किस्मों की कीमतें औसतन 5 रुपये प्रति किलो तक घट गई हैं।
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फिलहाल 1121 बासमती चावल की कीमत घटकर लगभग 80 रुपये प्रति किलो पर आ गई है, जबकि 1121 सेला 75 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है। इसके अलावा 1509, 1718 और 1401 जैसी अन्य प्रमुख किस्मों में 5 से 7 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात बने रहने पर आने वाले हफ्तों में कीमतों पर और दबाव पड़ सकता है।
IREF के उपाध्यक्ष देव गर्ग ने बताया कि ईरान लंबे समय से भारतीय बासमती चावल का एक अहम और स्थिर बाजार रहा है। लेकिन मौजूदा अस्थिरता के चलते वहां व्यापारिक चैनल प्रभावित हो रहे हैं। भुगतान में देरी हो रही है और खरीदारों का भरोसा कमजोर पड़ता जा रहा है, जिससे निर्यातकों को जोखिम बढ़ने का डर सता रहा है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा ने भी वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। हालांकि फेडरेशन का कहना है कि फिलहाल अमेरिका को होने वाले भारतीय बासमती निर्यात पर इसका सीधा और बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता जरूर बढ़ी है।
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आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से नवंबर के बीच भारत ने ईरान को करीब 4.68 अरब डॉलर मूल्य का बासमती चावल निर्यात किया, जिसकी मात्रा लगभग 5.98 लाख टन रही। मौजूदा हालात को देखते हुए फेडरेशन ने निर्यातकों को सलाह दी है कि वे ईरान पर निर्भरता कम करें और पश्चिम एशिया, अफ्रीका व यूरोप जैसे वैकल्पिक बाजारों की ओर रुख करें। साथ ही सुरक्षित भुगतान व्यवस्था अपनाने और केवल ईरान-केंद्रित स्टॉक पर अधिक जोखिम न लेने की भी चेतावनी दी गई है।