अंतरिक्ष युद्ध का अखाड़ा नहीं: यूएन में भारत ने हथियारों की होड़ रोकने के लिए मांगा सख्त कानून

संयुक्त राष्ट्र में भारत ने बाहरी अंतरिक्ष को युद्ध का अखाड़ा बनाने के बजाय सहयोग का क्षेत्र रखने की जोरदार वकालत की है। देश ने अंतरिक्ष में हथियारों की बढ़ती होड़ को रोकने के लिए एक सख्त और कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौते की मांग उठाई है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 21 October 2026, 2:45 PM IST

New Delhi: भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के मंच से एक बार फिर दुनिया का ध्यान अंतरिक्ष की सुरक्षा की ओर आकर्षित किया है। भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि बाहरी अंतरिक्ष किसी युद्ध का अखाड़ा नहीं, बल्कि आपसी सहयोग का क्षेत्र बनना चाहिए। अंतरिक्ष में हथियारों के बढ़ते खतरे और प्रतिस्पर्धा को रोकने के लिए भारत ने एक मजबूत, कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौते की जोरदार मांग उठाई है।

'हमारा अंतरिक्ष हम सबका है'

संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली समिति की बैठक में भारत का पक्ष रखते हुए सांसद सुधा मूर्ति ने कहा कि भारत अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में एक अग्रणी राष्ट्र के रूप में उभर रहा है। हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रमों का विस्तार देश के विकास और उसकी सुरक्षा, दोनों ही दृष्टियों से बेहद महत्वपूर्ण है। "वसुधैव कुटुंबक" की भावना को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि 'एक पृथ्वी, एक परिवार और एक भविष्य' के सिद्धांत पर चलते हुए बाहरी अंतरिक्ष पर पूरी मानवता का अधिकार है। इसलिए इसे टकराव की बजाय वैश्विक सहयोग का माध्यम होना चाहिए।

IND vs NZ: तेज पिचें और ठंडा मौसम, न्यूजीलैंड में टीम इंडिया के सामने दोहरी चुनौती; अय्यर ने भरी हुंकार

दोहरे उपयोग वाली तकनीक और अंतरराष्ट्रीय मतभेद

वर्तमान समय में अंतरिक्ष तकनीक के बदलते स्वरूप पर चिंता जताते हुए सांसद ने कहा कि आज अंतरिक्ष में ऐसी तकनीकों और संपत्तियों का इस्तेमाल बढ़ गया है, जिनका उपयोग शांति के साथ-साथ सैन्य उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है (दोहरे उपयोग वाली तकनीक)। अंतरिक्ष को हथियारों से मुक्त रखने के तरीकों को लेकर दुनिया भर के देशों में अलग-अलग राय और मतभेद बने हुए हैं।

इस स्थिति से निपटने के लिए भारत ने एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय समझौते की पैरवी की है, जो कानूनन बाध्यकारी हो, जिसे वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया जा सके और जिसकी सही से निगरानी (सत्यापन) हो सके। उन्होंने बताया कि इस तरह के समझौते पर 'कॉन्फ्रेंस ऑन डिसआर्मामेंट' (निरस्त्रीकरण सम्मेलन) में पहले ही कई देशों के बीच बातचीत हो चुकी है।

पारदर्शिता जरूरी, लेकिन कानूनी समझौते का विकल्प नहीं

भारत ने साफ किया कि वह अंतरिक्ष में पारदर्शिता और आपसी विश्वास बढ़ाने वाले तमाम उपायों का पूरा समर्थन करता है। साथ ही, ऐसे नियमों का भी स्वागत है जो सभी देशों के लिए समान और भेदभाव रहित हों। हालांकि, भारत का मानना है कि ये उपाय एक कानूनी समझौते के पूरक जरूर हो सकते हैं, लेकिन वे किसी कानूनी रूप से बाध्यकारी नियम की जगह नहीं ले सकते।

एक विकासशील देश के रूप में भारत ने यह भी चेतावनी दी कि अंतरिक्ष नियमों को बनाते समय इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि इससे शांतिपूर्ण और वैध वैज्ञानिक शोध कार्यों में किसी भी तरह की बाधा उत्पन्न न हो।

नितिन नवीन की ‘स्पेशल 34’ में MLA मैथिली ठाकुर, जानिए BJYM की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य क्या करते हैं?

भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियां और भविष्य के लक्ष्य

इस दौरान भारत की अंतरिक्ष यात्रा और उसकी सफलताओं का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया। साल 2023 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर भारत के ऐतिहासिक चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग का जिक्र करते हुए बताया गया कि देश अब अपने पहले मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन 'गगनयान' को लॉन्च करने की तैयारियों में जुटा हुआ है। इसके अलावा, आने वाले समय में देश के पास अपना खुद का 'भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन' स्थापित करने की भी महत्वाकांक्षी योजना है।

Location :  New Delhi

Published :  21 October 2026, 2:45 PM IST