इलेक्ट्रिकल वाहन तो ले ली, अब चार्ज कहाँ करें? भारत में EV मालिकों की सबसे बड़ी रोज की टेंशन

EV Charging Crisis: भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों की बिक्री तेजी से बढ़ रही है, लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर बेहद धीमा और अपर्याप्त है। अपार्टमेंट्स में पर्सनल चार्जर लगाने पर पाबंदी, पब्लिक चार्जर खराब, अलग-अलग ऐप्स और धीमी स्पीड EV मालिकों को परेशान कर रही है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 10 May 2026, 10:01 AM IST

EV Charging Crisis: भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बिक्री तेजी से बढ़ रही है। सरकार की नीतियों, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और पर्यावरण को लेकर जागरूकता ने लोगों को EV की ओर मोड़ा है। लेकिन जैसे-जैसे सड़कों पर इलेक्ट्रिक गाड़ियों की संख्या बढ़ रही है, वैसे-वैसे एक बड़ी समस्या भी सामने आ रही है- चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और उसकी खराब स्थिति।

हमने इस मुद्दे को जमीनी स्तर पर समझने के लिए कई EV यूजर्स और एक्सपर्ट्स से बात की। तस्वीर साफ है- गाड़ियाँ तो बढ़ रही हैं, लेकिन उन्हें चलाने के लिए जरूरी चार्जिंग नेटवर्क अभी भी कमजोर और असंतुलित है।

बिक्री बढ़ी, लेकिन भरोसा अभी भी अधूरा

FADA के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2026 में इलेक्ट्रिक पैसेंजर वाहनों की बिक्री पिछले साल के मुकाबले 75.1% बढ़कर 23,506 यूनिट तक पहुंच गई। वहीं इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर की बिक्री भी 60% से ज्यादा बढ़ी है।

लेकिन इस तेज ग्रोथ के बावजूद उपभोक्ताओं में एक डर बना हुआ है- 'अगर बीच रास्ते में बैटरी खत्म हो गई तो क्या होगा?'

इसी डर का असर हमें लखनऊ के EV मालिक संगम गुप्ता की बातों में सुनने को मिला। उन्होंने बताया, "कई बार चार्जिंग स्टेशन दूर होते हैं या काम नहीं करते। अगर बीच रास्ते गाड़ी बंद हो जाए तो धक्का देकर घर ले जाना पड़ता है।"

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शादी में EV बनी परेशानी की वजह

हमीरपुर जिले में हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया जिसने EV की असल चुनौती को उजागर कर दिया। एक शादी में दूल्हे को इलेक्ट्रिक कार गिफ्ट में मिली थी। लेकिन प्रयागराज जाते समय कार की बैटरी खत्म हो गई। चार्जिंग स्टेशन न मिलने की वजह से उन्हें स्थानीय लोगों की मदद से कार धक्का देकर आगे ले जानी पड़ी।

यह घटना सिर्फ एक किस्सा नहीं, बल्कि भारत के EV सिस्टम की एक बड़ी कमजोरी को दिखा रही है।

प्रतीकात्मक छवि (फोटो सोर्स-AI)

चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर: संख्या बढ़ी, लेकिन भरोसा नहीं

भारत में पब्लिक चार्जिंग स्टेशन 2022 में लगभग 5,000 थे, जो 2025 तक बढ़कर 29,000 से ज्यादा हो गए। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ संख्या बढ़ना समाधान नहीं है।

एक्सीकॉम की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 50% चार्जर किसी न किसी समय खराब पाए गए। करीब 25% चार्जर तकनीकी या मेंटेनेंस कारणों से बार-बार बंद रहते हैं।

EV चार्जिंग सॉल्यूशन कंपनी Zenergize के CEO नवनीत डागा एक इवेंट में बोले कि, "सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ चार्जर लगाना नहीं है, बल्कि उन्हें लगातार चालू रखना है। भारत की गर्मी, बिजली के उतार-चढ़ाव और ज्यादा इस्तेमाल से ये सिस्टम जल्दी खराब हो जाते हैं।"

चार्जिंग में समय और तकनीक की समस्या

भारत में एक इलेक्ट्रिक गाड़ी को चार्ज होने में औसतन 1.5 से 2 घंटे लगते हैं। जबकि दुनिया के कई देशों में फास्ट चार्जिंग 30 मिनट से 1 घंटे में हो जाती है। इसके अलावा एक और बड़ी परेशानी है- अलग-अलग चार्जिंग ऐप्स। एक EV यूजर को कई ऐप्स डाउनलोड करने पड़ते हैं ताकि वह यह जान सके कि कौन सा चार्जर काम कर रहा है। इससे अनुभव और भी जटिल हो जाता है।

प्रतीकात्मक छवि (फोटो सोर्स-AI)

भरोसे की सबसे बड़ी कमी

EV बैटरी निर्माता कंपनी Geon के आनंद काबरा का कहना है कि समस्या सिर्फ तकनीकी नहीं है, बल्कि भरोसे की भी है। "अगर 70% यूजर्स को खराब चार्जर का सामना करना पड़ रहा है, तो यह सिर्फ मशीन की नहीं बल्कि सिस्टम की फेल्योर है।"

घर पर चार्जिंग: सबसे बड़ी उम्मीद, लेकिन सबसे बड़ी बाधा भी

EV एक्सपर्ट्स मानते हैं कि 70-80% चार्जिंग घर पर होनी चाहिए, लेकिन भारत के अपार्टमेंट सिस्टम में यह आसान नहीं है। RWAs (रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन) सुरक्षा कारणों से चार्जिंग पॉइंट लगाने में हिचकिचाते हैं। बेसमेंट में आग का डर, वेंटिलेशन की कमी और ट्रांसफार्मर की क्षमता जैसी समस्याएँ इस प्रक्रिया को रोकती हैं।

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पब्लिक चार्जिंग स्टेशन की पहुंच भी बड़ी समस्या

अक्सर चार्जर होते तो हैं, लेकिन उनकी लोकेशन ऐसी होती है जहाँ 24 घंटे पहुंच संभव नहीं होती- जैसे मॉल या ऑफिस कॉम्प्लेक्स। रात में या हाईवे पर यात्रा करने वाले लोगों के लिए यह बड़ी मुश्किल बन जाती है। रिपोर्ट के अनुसार, 88% EV मालिकों ने कहा कि 'काम करने वाला चार्जिंग स्टेशन ढूंढना तनाव का कारण है।'

EV का भविष्य चार्जिंग पर टिका?

भारत में इलेक्ट्रिक गाड़ियों का भविष्य उज्ज्वल जरूर है, लेकिन यह तभी सफल होगा जब चार्जिंग नेटवर्क उतना ही मजबूत और भरोसेमंद बने जितना पेट्रोल पंप सिस्टम है। आज स्थिति यह है कि गाड़ियाँ तो तेजी से सड़कों पर उतर रही हैं, लेकिन उन्हें ऊर्जा देने वाला सिस्टम अभी भी पीछे चल रहा है।

Location :  New Delhi

Published :  10 May 2026, 10:01 AM IST