महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे ‘पावरफुल’ चेहरों में शुमार रहे डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री अजित पवार के असामयिक निधन के बाद राज्य की सियासत एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। Ajit Pawar के बाद महाराष्ट्र की सत्ता में अगला चेहरा कौन होगा इसको लेकर चर्चा तेज हो गई है।

Baramati/Mumbai: महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे ‘पावरफुल’ चेहरों में शुमार रहे डिप्टी सीएम और वित्त मंत्री अजित पवार के असामयिक निधन के बाद राज्य की सियासत एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। गुरुवार (29 जनवरी) को पंचतत्व में विलीन हुए ‘दादा’ को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई, लेकिन चिताएं ठंडी पड़ने से पहले ही सत्ता के गलियारों में अगली रणनीति पर चर्चाएं तेज हो चुकी हैं। सवाल साफ है अब महाराष्ट्र का नया Deputy CM कौन होगा और Baramati Assembly Seat का राजनीतिक भविष्य क्या दिशा लेगा?
बारामती के विद्या प्रतिष्ठान मैदान में उमड़ा जनसैलाब अजित पवार की जनस्वीकृति का जीवंत प्रमाण था। अंतिम संस्कार के दौरान Parth Pawar और Jai Pawar की सक्रिय मौजूदगी मंच पर रहकर जनप्रतिनिधियों और नेताओं से संवाद सिर्फ शोक नहीं, बल्कि एक सियासी संदेश भी माना जा रहा है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का नीचे बैठना और दोनों बेटों का आगे रहना, राजनीतिक हलकों में विरासत के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
अजित पवार की बारामती सीट पर सहानुभूति लहर स्वाभाविक है, लेकिन सवाल यह है कि पार्टी किस चेहरे पर दांव लगाएगी। क्या यह सीट परिवार के भीतर ही रहेगी या संगठन किसी अनुभवी चेहरे को आगे बढ़ाएगा? अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि सहानुभूति और संगठनात्मक पकड़ दोनों को साधने वाला नाम तलाशा जा रहा है, ताकि सीट भी सुरक्षित रहे और सत्ता संतुलन भी।
एनसीपी (Ajit गुट) के वरिष्ठ नेता और मंत्री रहरी झिरवाल (Narhari Zirwal) के बयान ने राजनीति में आग में घी डाल दिया है। उनकी यह मांग कि सुनेत्रा पवार को उपमुख्यमंत्री बनाया जाए, महज़ भावनात्मक अपील नहीं मानी जा रही। बता दें कि सुनेत्रा पवार फिलहाल Rajya Sabha MP हैं और सत्ता-संतुलन के लिहाज़ से उनका नाम कई खेमों को स्वीकार्य भी हो सकता है। झिरवाल का यह संकेत कि अब दोनों NCP गुटों को साथ आना चाहिए, आने वाले री-अलाइनमेंट की ओर इशारा करता है।
Ajit Pawar Family: विमान हादसे में जान गंवाने वाले अजित पवार किसके सबसे करीब थे…
अजित पवार के जाने से NCP में नेतृत्व का शून्य पैदा हुआ है। इस शून्य को भरने में Sunetra Pawar सबसे आगे दिखती हैं, लेकिन पवार परिवार की राजनीति हमेशा व्यावहारिक रही है। शरद पवार की रणनीतिक समझ और दुख के बीच स्थिरता बनाए रखना अब निर्णायक होगी। नेतृत्व ऐसा चाहिए जो पार्टी को एकजुट रखे, गठबंधन गणित साधे और सरकार की स्थिरता बनाए।