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New Delhi: दिल्ली-NCR में पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध के बावजूद नियमों की खुलेआम अनदेखी का मामला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट की ओर से पटाखों की बिक्री के लिए दी गई मोहलत शुक्रवार को खत्म हो गई थी। इसके बाद शनिवार से किसी भी तरह के पटाखों की बिक्री पर रोक लागू थी। इसके बावजूद दिल्ली और आसपास के इलाकों के बाजारों में पटाखों की दुकानदारी जारी रही। पड़ताल के दौरान कई जगह सामान्य और प्रतिबंधित पटाखे भी बिकते नजर आए।
सुप्रीम कोर्ट ने 4 से 6 नवंबर तक केवल प्रमाणित ग्रीन पटाखों की बिक्री की अनुमति दी थी। इसके लिए लाइसेंस, प्रमाणन और QR कोड जैसी शर्तें निर्धारित की गई थीं। वहीं, 7 और 8 नवंबर को केवल तय समय के दौरान आतिशबाजी की अनुमति थी। इसके बावजूद शनिवार को बाजारों में नियमों का उल्लंघन देखने को मिला।
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पड़ताल में सामने आया कि बाजारों में ग्रीन पटाखों के साथ सामान्य और प्रतिबंधित पटाखे भी उपलब्ध थे। कई जगह रेहड़ी-पटरी पर पटाखों की बिक्री होती दिखाई दी। ऐसे में सवाल उठता है कि जब बिक्री की समयसीमा समाप्त हो चुकी थी, तो प्रतिबंधित पटाखे बाजारों तक कैसे पहुंच रहे थे और इनके कारोबार पर रोक लगाने की जिम्मेदारी किसकी थी?
लाइसेंस लेकर कारोबार करने वाले पटाखा विक्रेताओं का कहना है कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक सभी नियमों का पालन किया। प्रमाणित ग्रीन पटाखों की बिक्री के लिए उन्हें केवल तीन दिन का समय मिला। दूसरी ओर, बिना लाइसेंस पटाखे बेचने वालों पर नियमों का पालन कराने का दबाव नजर नहीं आया।
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इस पूरे मामले में सबसे बड़ा विरोधाभास वैध और अवैध कारोबार के बीच दिखाई दिया। एक तरफ लाइसेंसधारी दुकानदारों को प्रमाणन, लाइसेंस और समयसीमा जैसी शर्तों का पालन करना पड़ा, वहीं दूसरी तरफ अवैध बिक्री का सिलसिला जारी रहा। कारोबारियों का कहना है कि नियमों का पालन करने वाले व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका बचा हुआ स्टॉक और निवेश भी चिंता का विषय बना हुआ है।
Location : New Delhi
Published : 8 November 2026, 10:59 AM IST
Topics : Delhi Delhi NCR Air Pollution Firecracker Ban