आखिर कैसे जंतर-मंतर का छोटा सा धरना बन गया देश का सबसे बड़ा युवा आंदोलन?

जंतर-मंतर पर शुरू हुआ CJP का छात्र आंदोलन कुछ ही दिनों में देशव्यापी चर्चा का विषय बन गया। सोनम वांगचुक के अनशन, युवाओं के बढ़ते समर्थन, पुलिस कार्रवाई और संसद मार्च के आह्वान ने आंदोलन को नई दिशा दी। पढ़िए शुरुआत से लेकर संसद मार्च तक की पूरी टाइमलाइन।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 20 July 2026, 6:04 PM IST

New Delhi: दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुआ एक सीमित छात्र आंदोलन कुछ ही हफ्तों में राष्ट्रीय बहस का विषय बन गया। पहले यह प्रदर्शन शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग तक सीमित था, लेकिन धीरे-धीरे इसमें सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के शामिल होने, भूख हड़ताल, पुलिस कार्रवाई और संसद मार्च के आह्वान के बाद देशभर के युवाओं का समर्थन जुड़ता गया। 20 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के पहले दिन यह आंदोलन अपने सबसे बड़े पड़ाव पर पहुंच गया।

कैसे हुई आंदोलन की शुरुआत?

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की शुरुआत सोशल मीडिया पर एक प्रतीकात्मक अभियान के रूप में हुई। सरकार की आलोचना करने वाले युवाओं की तुलना "कॉकरोच" से किए जाने के बाद कई युवाओं ने इसे विरोध के प्रतीक के रूप में अपनाया। इसके बाद पूर्व छात्र अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं को जोड़ना शुरू किया। शुरुआत में आंदोलन ऑनलाइन रहा, लेकिन जल्द ही यह जमीनी स्तर पर पहुंच गया।

कैसे हुई आंदोलन की शुरुआत?

NEET विवाद के बाद आंदोलन को मिली रफ्तार

हाल के परीक्षा विवाद, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं पर उठे सवालों के बाद हजारों छात्र इस अभियान से जुड़ने लगे। CJP ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई। इसके बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जून से अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया गया।

सोनम वांगचुक की एंट्री से बदला आंदोलन का स्वरूप

धरने के नौवें दिन पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक आंदोलन में शामिल हुए। उन्होंने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के बाद अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की। वांगचुक के आने के बाद आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर अधिक समर्थन मिलने लगा। विभिन्न सामाजिक संगठनों, छात्र समूहों और कई जनप्रतिनिधियों ने भी प्रदर्शन का समर्थन किया।

भूख हड़ताल के दौरान बिगड़ी तबीयत

लंबे अनशन के दौरान डॉक्टरों की निगरानी में वांगचुक का स्वास्थ्य लगातार गिरता गया। CJP का दावा था कि उनका वजन काफी कम हो चुका है और डिहाइड्रेशन की स्थिति भी बन गई थी। स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जिसे आंदोलनकारियों ने जबरन कार्रवाई बताया।

8 जुलाई को हुआ संसद मार्च का ऐलान

अनशन के दौरान ही सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई को संसद तक मार्च निकालने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं से बड़ी संख्या में दिल्ली पहुंचने की अपील की और कहा कि शिक्षा और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर देशव्यापी आवाज उठाई जानी चाहिए।

20 जुलाई: संसद मार्च और पुलिस कार्रवाई

मानसून सत्र के पहले दिन हजारों प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पर एकत्र हुए। दिल्ली पुलिस ने बिना अनुमति मार्च का हवाला देते हुए संसद की ओर बढ़ रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने की कोशिश की। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई, लाठीचार्ज हुआ और आंसू गैस के गोले भी छोड़े गए। इस दौरान कई प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए जाने के दावे भी सामने आए।

सरकार से बातचीत और तीन प्रमुख मांगें

घटनाक्रम के बीच CJP के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। प्रतिनिधियों ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं—

  • सोनम वांगचुक को अस्पताल से रिहा किया जाए।
  • शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाया जाए।
  • कथित तौर पर आत्महत्या करने वाले NEET छात्र के परिवार को आर्थिक सहायता दी जाए।

सरकार की ओर से मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया गया, हालांकि कोई अंतिम निर्णय घोषित नहीं किया गया।

आगे क्या?

सोनम वांगचुक ने स्वास्थ्य कारणों से अपना अनशन समाप्त कर दिया है, लेकिन आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि उनकी मांगें पूरी होने तक विरोध जारी रहेगा। संसद मार्च के बाद यह आंदोलन शिक्षा सुधार, भर्ती प्रक्रिया और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श का केंद्र बन चुका है।

Location :  New Delhi

Published :  20 July 2026, 6:04 PM IST