1 फरवरी से तंबाकू और पान मसाला जैसे उत्पादों पर नई जीएसटी दरें लागू होने जा रही हैं। अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और स्वास्थ्य उपकर के चलते इन उत्पादों की कीमतों में सीधा इजाफा होगा।

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New Delhi: अगर आप सिगरेट, गुटखा, जर्दा या पान मसाला का सेवन करते हैं तो यह खबर आपके लिए अहम है। 1 फरवरी से इन हानिकारक उत्पादों पर नई जीएसटी दरें लागू हो रही हैं, जिससे इनकी कीमतों में बढ़ोतरी तय मानी जा रही है। हालांकि नई जीएसटी दरों को लेकर फैसला सितंबर 2025 में हो चुका था, लेकिन तंबाकू और इससे जुड़े उत्पादों पर इसे 1 फरवरी से लागू किया जा रहा है।
40 प्रतिशत जीएसटी के ऊपर लगेगा अतिरिक्त टैक्स
1 फरवरी से सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा। वहीं पान मसाला पर स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर लागू होगा। यह टैक्स जीएसटी की अधिकतम 40 प्रतिशत दर के ऊपर लगाया जाएगा। अब तक इन उत्पादों पर 28 प्रतिशत जीएसटी और क्षतिपूर्ति उपकर लागू था, जिसे अब नई व्यवस्था से बदला जा रहा है।
MRP के आधार पर तय होगा टैक्स
एक फरवरी से तंबाकू उत्पादों जैसे चबाने वाला तंबाकू, फिल्टर खैनी, जर्दायुक्त सुगंधित तंबाकू और गुटखा पर MRP आधारित टैक्स व्यवस्था लागू होगी। इसका मतलब है कि पैकेट पर लिखी गई खुदरा कीमत के आधार पर ही जीएसटी तय किया जाएगा। इससे कंपनियों के लिए टैक्स बचाना मुश्किल हो जाएगा और कीमतें बढ़ने की पूरी संभावना है।
पान मसाला कंपनियों पर सख्ती
पान मसाला निर्माताओं को स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर कानून के तहत नया पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। इसके अलावा सभी पैकिंग मशीनों पर सीसीटीवी सिस्टम लगाना होगा, जिसकी रिकॉर्डिंग कम से कम 24 महीने तक सुरक्षित रखनी होगी। कंपनियों को मशीनों की संख्या और क्षमता की जानकारी भी उत्पाद शुल्क विभाग को देनी होगी।
सिगरेट की लंबाई से तय होगा उत्पाद शुल्क
केंद्रीय उत्पाद शुल्क अधिनियम में संशोधन के बाद अब सिगरेट की लंबाई के आधार पर उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा। यह शुल्क 2.05 रुपये से लेकर 8.50 रुपये प्रति सिगरेट तक तय किया गया है। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का मकसद हानिकारक उत्पादों की खपत को हतोत्साहित करना है। हालांकि इसका सीधा असर उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ना तय है।