
सर सैयद अहमद खान (file photo)
NEW DELHI: भारत के महान शिक्षाविद्, समाज सुधारक और विचारक सर सैयद अहमद खान का नाम इतिहास में सम्मान के साथ लिया जाता है। उन्होंने शिक्षा को समाज की तरक्की का सबसे बड़ा माध्यम माना और लोगों को आधुनिक शिक्षा अपनाने का लिए प्रेरित किया। उनका जन्म 17 अक्टूबर 1817 को दिल्ली में हुआ था। उनकी जयंती पर उन्हें याद करते हुए उनके शिक्षा और समाज सुधार के क्षेत्र में दिए गए योगदान को समझना जरूरी है।
सर सैयद अहमद का मानना था कि किसी भी समाज की तरक्की के लिए शिक्षा बेहद जरूरी है। वे चाहते थे कि भारतीय समाज आधुनिक विज्ञान,अंग्रेजी और अन्य विषयों की शिक्षा प्राप्त करे, ताकि लोग बदलते समय के साथ आगे बढ़ सके। उन्होंने लोगों को पुरानी सोच से बाहर निकालकर ज्ञान और तर्क के आधार पर निर्णय लेने की सलाह दी। 1857 के विद्रोह के बाद उन्होंने हिंदू और मुसलमान समुदायों के बीच आपसी समझ और सहयोग बढ़ाने पर भी जोर दिया। उनका मानना था कि आपसी भाईचारे के माध्यम से समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
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सर सैय्यद अहमद खान के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक शिक्षा को बढ़ावा देना था। उन्होंने वर्ष 1875 अलीगढ़ में मोहम्मडन एंग्लो-ओरिेएंटल स्कूल की स्थापना की थी, जो बाद में कालेज बना। इसी संस्थान ने आगे चलकर 1920 में विश्वविघालय का रुप ले लिया। इस संस्थान के उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा देना और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है। उनके प्रयासों से शुरु हुआ अलीगढ़ आंदोलन जो शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
सर सैयद अहमद खान केवल शिक्षा के ही समर्थक नहीं थे, बल्कि समाज में फैली रुढ़ियों और अंधविश्वासों को दूर करने में भी काम किया है। उन्होंने वैज्ञानिक सोच और सामाजिक जागरूकता पर भी जोर दिया। उनका मानना था कि शिक्षित होंगे तो वे अपनी जिम्मेदारियों और अधिकारों को समझेंगे। उन्होंने लेखन के माध्यम से भी लोगों को जागरूक करने की भी कोशिश की। उनकी सोच ने आने वाली पीढ़ी को शिक्षा के महत्व को समझने की प्रेरणा दी।
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सर सैयद अहमद खान का जीवन हमें सिखाता है कि शिक्षा केवल नौकरी पाने का साधन नहीं, बल्कि समाज और देश को आगे बढ़ने की ताकत भी है। आज जब भारत ज्ञान ,विज्ञान में आगे बढ़ रहा है, तब उनके विचार और भी महत्वपूर्ण हो जाते है।
Location : New Delhi
Published : 17 October 2026, 10:29 AM IST