RIP Ajit Pawar: बॉलीवुड छोड़कर क्यों चुना राजनीति का रास्ता? जानिये अजीत पवार से जुड़ी खास बातें

अजित पवार का नाम महाराष्ट्र की राजनीति में सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है। फिल्मी दुनिया से दूर रहकर उन्होंने शरद पवार की राह चुनी और सत्ता के शिखर तक पहुंचे। जानिए उनका पूरा राजनीतिक सफर।

Post Published By: Subhash Raturi
Updated : 28 January 2026, 10:26 AM IST

Baramati: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का विमान बुधवार सुबह बारामती में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें उनका निधन हो गया। लैंडिंग के दौरान हुए इस हादसे में विमान धुएं के गुबार के साथ किसी खेत में गिरा। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि विमान में डिप्टी सीएम पवार सहित कुल 6 लोग सवार थे। शुरुआती रिपोर्टों में तीन से छह लोगों की मौत की खबरें आई हैं।

कौन थे अजित पवार?

अगर अजित अनंत राव पवार अपने पिता अनंतराव पवार के रास्ते पर चलते, तो संभव था कि उनका नाम बॉलीवुड की चमक-दमक में गिना जाता। अनंतराव पवार मशहूर फिल्म निर्देशक वी. शांताराम के साथ काम कर चुके थे। लेकिन अजित पवार ने ग्लैमर की दुनिया छोड़कर अपने चाचा शरद पवार की राजनीतिक राह को चुना और महाराष्ट्र की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई।

अजित पवार का जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ, जहां राजनीति और समाजसेवा की गहरी जड़ें थीं। शरद पवार न सिर्फ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे, बल्कि केंद्र सरकार में भी अहम मंत्री पदों पर रहे। इसी राजनीतिक माहौल ने अजित पवार की सोच और महत्वाकांक्षा को दिशा दी। शुरुआत से ही उनका झुकाव सत्ता और प्रशासन की ओर रहा।

कैसे किया राजनीति में प्रवेश?

उन्होंने राजनीति में प्रवेश पारंपरिक सहकारी आंदोलन के जरिए किया। महाराष्ट्र में शरद पवार को चीनी सहकारी संस्थाओं का ‘बेताज बादशाह’ माना जाता है और अजित पवार ने भी इसी रास्ते से अपनी राजनीतिक नींव मजबूत की। 1991 में वह बारामती से सांसद चुने गए, लेकिन कुछ ही महीनों बाद उन्होंने यह सीट छोड़ दी और राज्य की राजनीति में सक्रिय हो गए।

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बारामती विधानसभा सीट से जीत के बाद अजित पवार ने धीरे-धीरे खुद को एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया। जब शरद पवार मुख्यमंत्री बने, तब अजित पवार को विभिन्न विभागों में राज्य मंत्री बनाया गया। 1999 में शरद पवार ने कांग्रेस से अलग होकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) बनाई, तो अजित पवार भी उनके साथ नई पार्टी में शामिल हो गए।

2009 के विधानसभा चुनावों के बाद अजित पवार की महत्वाकांक्षा खुलकर सामने आई। उपमुख्यमंत्री पद न मिलने पर उनकी नाराजगी चर्चा में रही, लेकिन 2010 में उन्होंने यह पद हासिल कर लिया। इसके बाद वह कई बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने और राज्य की सत्ता में उनकी पकड़ और मजबूत होती चली गई।

अजित पवार के समर्थक उनको दादा कहकर क्यों बुलाते थे?

अजित पवार को उनके समर्थक ‘दादा’ कहकर बुलाते थे। यह नाम उनके प्रभाव और जनाधार का प्रतीक बन चुका था। सोशल मीडिया से लेकर शैक्षणिक संस्थानों तक, ‘अजित दादा पवार’ नाम की गूंज सुनाई देती थी। उनकी छवि एक सख्त, महत्वाकांक्षी और निर्णायक नेता की रही।

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हालांकि उनका करियर विवादों से भी अछूता नहीं रहा। सिंचाई विभाग से जुड़े आरोपों और राजनीतिक उठापटक के बावजूद अजित पवार ने बार-बार सत्ता में वापसी की। आज भी उन्हें महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे ताकतवर नेताओं में गिना जाता है और माना जाता है कि मुख्यमंत्री की कुर्सी उनकी महत्वाकांक्षा का सबसे बड़ा लक्ष्य रही है। बॉलीवुड की चकाचौंध से दूर रहकर अजित पवार ने जिस तरह राजनीति में अपना मुकाम बनाया, वह उन्हें महाराष्ट्र की सत्ता का एक अहम चेहरा बनाता है।

Location : 
  • Baramati

Published : 
  • 28 January 2026, 10:26 AM IST