NASA का आर्टेमिस-2 मिशन 54 साल बाद इंसानों को चांद के करीब ले जाने जा रहा है। यह मिशन चांद पर लैंड नहीं करेगा, लेकिन भविष्य में वहां स्थायी बेस बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

NASA का आर्टेमिस-2 मिशन तैयार (IMG: Google)
New Delhi: अंतरिक्ष की काली खामोशी में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। जैसे कोई पुराना अधूरा हिसाब चुकता होना बाकी हो। करीब 54 साल पहले इंसान ने चांद की सतह पर कदम रखकर इतिहास लिखा था, लेकिन उसके बाद जैसे यह मिशन ठंडे बस्ते में चला गया। अब अचानक से सब कुछ फिर से गर्म हो गया है। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने एक ऐसा प्लान सामने रखा है, जो न सिर्फ चांद तक पहुंचने की कहानी है, बल्कि वहां स्थायी ठिकाना बनाने की साजिश जैसा लगता है। और इस पूरी कहानी के बीच सबसे बड़ा किरदार है- आर्टेमिस-2 मिशन। सवाल ये है कि आखिर इतने सालों बाद अचानक चांद पर लौटने की ये बेचैनी क्यों? क्या ये सिर्फ विज्ञान है या इसके पीछे कुछ और भी खेल चल रहा है?
NASA ने हाल ही में अगले एक दशक का जो रोडमैप जारी किया है, उसने दुनिया का ध्यान खींच लिया है। इस योजना के मुताबिक, एजेंसी चांद पर एक स्थायी बेस बनाना चाहती है। यानी अब चांद सिर्फ घूमने की जगह नहीं रहेगा, बल्कि इंसानों का ठिकाना बनने जा रहा है। इस प्लान में साफ तौर पर बताया गया है कि आने वाले वर्षों में चांद पर जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। इसमें रहने की व्यवस्था, रिसर्च स्टेशन और भविष्य के मिशनों के लिए लॉन्चिंग पॉइंट तक शामिल है। अगर यह योजना सफल होती है, तो चांद भविष्य में मंगल जैसे दूर के मिशनों के लिए एक ‘स्टॉपओवर’ बन सकता है।
आर्टेमिस-2, NASA के आर्टेमिस प्रोग्राम का दूसरा मिशन है। यह 1972 के Apollo 17 के बाद पहला ऐसा मिशन होगा, जिसमें इंसान चांद के करीब जाएंगे। यह मिशन लगभग 10 दिनों का होगा और इसमें स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट और ओरायन स्पेसक्राफ्ट का इस्तेमाल किया जाएगा। खास बात यह है कि यह मिशन चांद पर लैंड नहीं करेगा, बल्कि उसके चारों ओर घूमकर वापस आएगा। इससे पहले 2022 में Artemis 1 लॉन्च किया गया था, जो एक मानवरहित मिशन था। उसी से मिली जानकारी के आधार पर अब यह मानव मिशन तैयार किया गया है।
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आर्टेमिस-2 मिशन में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल होंगे, और हर एक की भूमिका बेहद अहम है। रीड वाइसमैन इस मिशन के कमांडर हैं, जिनके पास पहले से अंतरिक्ष उड़ान का अनुभव है। विक्टर ग्लोवर इस मिशन के पायलट होंगे और इतिहास में चांद के करीब जाने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति बनेंगे। क्रिस्टीना कॉच, जो पहले ही अंतरिक्ष में लंबा समय बिताने का रिकॉर्ड बना चुकी हैं, मिशन स्पेशलिस्ट के तौर पर शामिल हैं। वहीं जेरेमी हैनसेन, जो Canadian Space Agency का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, इस मिशन के जरिए चांद के करीब जाने वाले पहले कनाडाई बनेंगे।
इस मिशन की लॉन्चिंग कई बार टल चुकी है। पहले फरवरी 2026 की तारीख तय थी, फिर मार्च में कोशिश की गई, लेकिन तकनीकी समस्याओं के चलते मिशन आगे बढ़ता रहा। अब NASA ने 1 अप्रैल 2026 को लॉन्चिंग की तैयारी पूरी कर ली है। यह लॉन्च Kennedy Space Center से किया जाएगा। अगर उस दिन मौसम या तकनीकी दिक्कत आई, तो अप्रैल में ही बैकअप तारीखें भी रखी गई हैं।
आर्टेमिस-2 की उड़ान बेहद सुनियोजित होगी। लॉन्च के बाद यान पहले पृथ्वी की कक्षा में जाएगा, जहां सिस्टम चेक किए जाएंगे। इसके बाद इसे चांद की दिशा में भेजा जाएगा। करीब चार दिन की यात्रा के बाद यह चांद के पास पहुंचेगा और उसकी सतह से हजारों किलोमीटर ऊपर से गुजरेगा। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री चांद के उस हिस्से को देखेंगे, जो पृथ्वी से कभी दिखाई नहीं देता।
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इस मिशन का सबसे बड़ा उद्देश्य इंसानों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। पहली बार ओरायन कैप्सूल में इंसान सवार होंगे, इसलिए हर सिस्टम की जांच बेहद जरूरी है। इसके अलावा, इस मिशन के जरिए भविष्य के मिशनों खासतौर पर Artemis 3 की तैयारी की जाएगी, जिसमें इंसानों को चांद पर उतारने की योजना है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब इंसान जा रहे हैं, तो चांद पर उतरेंगे क्यों नहीं? इसका जवाब तकनीकी है। दरअसल, ओरायन स्पेसक्राफ्ट में लैंडिंग की क्षमता नहीं है। इसके लिए एक अलग लूनर लैंडर की जरूरत होती है, जो अभी तैयार नहीं है। यह लैंडर SpaceX द्वारा विकसित किया जा रहा है, जिसे स्टारशिप HLS कहा जाता है।
अगर सब कुछ योजना के मुताबिक चलता है, तो आने वाले वर्षों में चांद पर इंसानों का स्थायी बेस बन सकता है। यह न सिर्फ वैज्ञानिक रिसर्च के लिए, बल्कि अंतरिक्ष में आगे बढ़ने के लिए एक बड़ा कदम होगा।
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