
यूरोप में जनाक्रोश (Img- X)
New Delhi: यूरोप के कई देशों में विरोध प्रदर्शनों ने सरकारों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। कहीं युवा शिक्षा व्यवस्था में बदलाव मांग रहे हैं, तो कहीं लोग बढ़ते किराये, पेंशन और सरकारी नीतियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। फ्रांस, इटली, स्पेन, पुर्तगाल, अल्बानिया और बेल्जियम में हुए प्रदर्शनों के दौरान कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव हुआ।
कुछ शहरों में आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा, जबकि अन्य स्थानों पर लोगों ने शांतिपूर्ण मार्च निकाले। इन घटनाओं के बीच एक बड़ा सवाल उभर रहा है क्या यूरोप में आर्थिक दबाव और राजनीतिक असंतोष अब सड़कों पर ज्यादा खुलकर सामने आने लगा है?
फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, देशभर में करीब 4.1 लाख लोगों ने प्रदर्शनों में हिस्सा लिया। वहीं, जनरल कन्फेडरेशन ऑफ लेबर (सीजीटी) यूनियन ने प्रदर्शनकारियों की संख्या लगभग 8 लाख बताई। सरकार ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 70 हजार पुलिसकर्मियों को तैनात किया।
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अधिकारियों के अनुसार, 135 लोगों को गिरफ्तार किया गया और उनके पास से हथियार भी बरामद हुए। पेरिस सहित कई शहरों में दिन के समय प्रदर्शन अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहे, लेकिन शाम को कुछ जगहों पर हिंसा भड़क गई। ल्योन में सड़क जाम करने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया। नांत में भी पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव देखने को मिला।
इटली के रोम और मिलान में युवाओं, छात्रों और अन्य नागरिकों ने प्रदर्शन किए। रोम में प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री जियॉर्जिया मेलोनी के इस्तीफे की मांग उठाई। पिछले सप्ताह हुई तोड़फोड़ और हिंसा के बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। मिलान में अतिरिक्त सैनिक तैनात किए गए और कई बड़े ब्रांड्स के शोरूम तथा एप्पल स्टोर को बंद रखना पड़ा। कुछ प्रदर्शनकारियों ने ऊर्जा नियामक कार्यालय के बाहर खाद फेंककर विरोध जताया और बिजली बिल की प्रतीकात्मक प्रति जलाई। हालांकि, रोम में छात्रों के कुछ समूहों ने शांतिपूर्ण मार्च भी निकाला और हिंसा से दूरी बनाए रखने की बात कही।
स्पेन में बढ़ते किराये और आवास की लागत ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। कई नागरिकों के लिए घर का किराया चुकाना मुश्किल होता जा रहा है। मैड्रिड में पेंशनभोगियों और अन्य लोगों ने सार्वजनिक पेंशन में कटौती या निजीकरण के विरोध में मार्च निकाला। वहीं, पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में प्रदर्शनकारियों ने किफायती आवास की मांग की। उन्होंने सरकार के उन उपायों का विरोध किया, जिनसे किराया बढ़ाने की सीमा में ढील और किराया न चुकाने वाले किरायेदारों को बेदखल करना आसान हो सकता है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इससे किरायेदारों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
अल्बानिया की राजधानी तिराना में शिक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों ने प्रदर्शन किया। उनकी मांगों में ट्यूशन फीस कम करना, शिक्षा पर सरकारी खर्च बढ़ाना और व्यवस्था में भ्रष्टाचार खत्म करना शामिल है। कुछ प्रदर्शनकारियों ने सरकार के इस्तीफे की मांग भी उठाई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।
बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में भी सरकार विरोधी प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हुई। यहां प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में बेहतर सुविधाओं की मांग कर रहे थे। कुछ लोगों ने सड़क पर रखी वस्तुओं को इकट्ठा कर आग लगाने की कोशिश भी की।
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प्रदर्शनों का सिलसिला आने वाले दिनों में भी जारी रहने की संभावना है। फ्रांस की प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने 5 नवंबर को देशव्यापी आम हड़ताल का आह्वान किया है। स्पेन में बढ़ते किराये के मुद्दे पर 11 नवंबर को हड़ताल की योजना बताई गई है। इटली में यूनियनों ने 20 नवंबर को कार्रवाई दिवस का ऐलान किया है। अलग-अलग देशों में आंदोलन के कारण भले ही अलग हैं, लेकिन महंगाई, जीवनयापन की लागत, शिक्षा और सरकारी नीतियों को लेकर असंतोष कई जगह सामने आ रहा है।
इन घटनाओं को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या मानकर देखना अधूरा होगा। कई जगह लोग रोजमर्रा की आर्थिक मुश्किलों और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं, जबकि कुछ प्रदर्शनों में सरकारों और राजनीतिक नेताओं के खिलाफ नाराजगी भी दिखी। वहीं, हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों की चिंताओं को भी प्रभावित किया है। यूरोप के अलग-अलग देशों में हालात और मांगें एक जैसी नहीं हैं, लेकिन ये प्रदर्शन दिखाते हैं कि आवास, शिक्षा, पेंशन और सरकारी जवाबदेही जैसे मुद्दे सार्वजनिक बहस के केंद्र में हैं।
Location : New Delhi
Published : 25 October 2026, 12:38 PM IST