8.7 करोड़ Facebook यूजर्स का डेटा, Meta पर 25 अरब डॉलर का जुर्माना; जानिए Trump का कनेक्शन

Meta को न्यू मैक्सिको की अदालत ने Facebook डेटा प्राइवेसी मामले में 25 अरब डॉलर का जुर्माना भरने का आदेश दिया है। जानिए Cambridge Analytica स्कैंडल और Donald Trump के 2016 चुनाव अभियान से इसका क्या संबंध है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 22 October 2026, 9:52 AM IST

New Delhi: अमेरिकी राज्य न्यू मैक्सिको की अदालत ने सोशल मीडिया कंपनी Meta Platforms को 25 अरब डॉलर का नागरिक जुर्माना चुकाने का आदेश दिया है। यह रकम भारतीय मुद्रा में करीब 2.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक बैठती है। अदालत का यह फैसला फेसबुक यूजर्स की निजता, निजी डेटा के इस्तेमाल और उपभोक्ताओं को कथित तौर पर गुमराह करने से जुड़े मामले में आया है। इस मामले की जड़ें Cambridge Analytica डेटा स्कैंडल से जुड़ी हैं, जिसने 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान फेसबुक यूजर्स के डेटा के इस्तेमाल को लेकर दुनिया भर में विवाद खड़ा कर दिया था। हालांकि, Meta इस फैसले के खिलाफ अपील करने की बात कह चुकी है।

Meta पर क्यों लगा 25 अरब डॉलर का जुर्माना?

न्यू मैक्सिको के अटॉर्नी जनरल राउल टोरेज ने वर्ष 2021 में फेसबुक के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। राज्य सरकार का आरोप था कि कंपनी ने यूजर्स को उनके निजी डेटा की सुरक्षा, थर्ड-पार्टी ऐप्स की पहुंच और प्लेटफॉर्म पर गलत सूचना तथा हेट स्पीच को नियंत्रित करने के अपने प्रयासों के बारे में गुमराह किया।

21 अक्टूबर 2026 को अदालत ने जूरी के निष्कर्षों के आधार पर Meta पर 25 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया। जूरी ने सितंबर में पाया था कि फेसबुक और उसके नेतृत्व की ओर से दिए गए 29 बयानों में से 26 भ्रामक थे। इन बयानों को लेकर न्यू मैक्सिको के उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत 43,899,725 उल्लंघन पाए गए थे।

219 अरब डॉलर तक पहुंच सकता था जुर्माना

न्यू मैक्सिको के कानून के तहत प्रत्येक जानबूझकर किए गए उल्लंघन पर अधिकतम 5,000 डॉलर का नागरिक जुर्माना लगाया जा सकता है। इसी आधार पर संभावित जुर्माने की रकम 219 अरब डॉलर से अधिक आंकी गई थी। हालांकि, न्यायाधीश फ्रांसिस मैथ्यू ने इसे घटाकर 25 अरब डॉलर कर दिया।

राज्य के अटॉर्नी जनरल के कार्यालय के मुताबिक, यह मामला केवल डेटा लीक तक सीमित नहीं था। इसमें फेसबुक की ओर से यूजर्स को उनकी निजी जानकारी पर नियंत्रण, डेटा साझा करने की प्रक्रिया और प्लेटफॉर्म पर हानिकारक सामग्री को रोकने के प्रयासों के बारे में दिए गए बयानों की भी जांच हुई।

क्या है Cambridge Analytica डेटा स्कैंडल?

Cambridge Analytica ब्रिटेन की एक राजनीतिक परामर्श कंपनी थी। वर्ष 2018 में सामने आए खुलासों के मुताबिक, कंपनी ने फेसबुक के एक थर्ड-पार्टी ऐप के माध्यम से करीब 8.7 करोड़ यूजर्स की निजी जानकारी तक पहुंच हासिल की थी। इस डेटा के संग्रह और इस्तेमाल को लेकर यूजर्स की सहमति तथा उनकी निजता पर गंभीर सवाल उठे थे।

विवाद इसलिए भी बड़ा था क्योंकि इस जानकारी का इस्तेमाल राजनीतिक प्रचार और मतदाताओं को लक्षित करने के संदर्भ में चर्चा में आया। इस घटना ने सोशल मीडिया कंपनियों की डेटा सुरक्षा नीतियों और यूजर्स की निजी जानकारी के व्यावसायिक तथा राजनीतिक इस्तेमाल पर वैश्विक बहस छेड़ दी।

Donald Trump के 2016 के चुनाव से क्या है कनेक्शन?

डोनाल्ड ट्रंप के 2016 के राष्ट्रपति चुनाव अभियान से जुड़े राजनीतिक परामर्श नेटवर्क और Cambridge Analytica के बीच संबंधों को लेकर उस समय व्यापक चर्चा हुई थी। कंपनी पर आरोप लगा था कि उसने फेसबुक यूजर्स की जानकारी का इस्तेमाल राजनीतिक विज्ञापनों और मतदाताओं को लक्षित करने के लिए किया।

हालांकि, न्यू मैक्सिको में आया मौजूदा फैसला सीधे तौर पर ट्रंप के चुनाव अभियान की वैधता या चुनाव परिणाम को लेकर नहीं है। यह मुकदमा मुख्य रूप से फेसबुक की डेटा सुरक्षा संबंधी नीतियों, उपभोक्ताओं को दिए गए बयानों और राज्य के उपभोक्ता संरक्षण कानून के कथित उल्लंघनों पर केंद्रित था।

Meta ने फैसले पर क्या रुख अपनाया?

Meta ने इस फैसले का विरोध किया है और अपील करने की बात कही है। कंपनी का तर्क है कि यह निर्णय न्यू मैक्सिको में उसके कारोबार को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में कानूनी लड़ाई आगे भी जारी रहने की संभावना है।

Location :  New Delhi

Published :  22 October 2026, 9:52 AM IST