
चेचक के निशानों ने बढ़ाई चेहरे को लेकर झिझक (Source: Pinterest)
Om Puri Birth Anniversary: फिल्मी दुनिया में अक्सर हीरो की पहचान उसके लुक्स और आकर्षक चेहरे से जोड़कर देखी जाती है। लेकिन अभिनेता ओम पुरी की कहानी इस सोच को चुनौती देती है। बचपन में चेचक के कारण उनके चेहरे पर निशान पड़ गए थे। वह खुद भी अपने चेहरे को लेकर असहज महसूस करते थे। उन्हें लगता था कि उनका चेहरा पारंपरिक फिल्मी हीरो जैसा नहीं है। इसके बावजूद उन्होंने अपने अभिनय के दम पर भारतीय सिनेमा से लेकर हॉलीवुड तक अपनी पहचान बनाई। 18 अक्टूबर को उनकी जयंती पर जानिए, कैसे उन्होंने अपनी इसी झिझक को पीछे छोड़कर सफलता हासिल की।
ओम पुरी का जन्म 18 अक्टूबर 1950 को अंबाला में हुआ था। बचपन में चेचक की बीमारी के कारण उनके चेहरे पर गहरे निशान रह गए। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि जब वह व्यावसायिक हिंदी फिल्में देखते थे, तो उन्हें लगता था कि उनका चेहरा उन फिल्मों के पारंपरिक, खूबसूरत हीरो जैसा नहीं है।
ओम पुरी के मुताबिक, उनका चेहरा और नाक पारंपरिक फिल्मी छवि से अलग थे। इस वजह से वह शुरुआत में अभिनय की दुनिया में अपनी जगह को लेकर आश्वस्त नहीं थे।
ओम पुरी के मन में यह धारणा तब बदली, जब उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सिनेमा और सत्यजीत रे तथा मृणाल सेन जैसे फिल्मकारों की फिल्में देखीं। इन फिल्मों में उन्हें ऐसे चेहरे और किरदार नजर आए, जो पारंपरिक हीरो की छवि से अलग थे।
धीरे-धीरे उन्हें एहसास हुआ कि अभिनय के लिए खूबसूरत चेहरा ही सबसे जरूरी नहीं है। वह अपने चेहरे को बदलने के बजाय अपनी प्रतिभा के दम पर पहचान बनाना चाहते थे। ओम पुरी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि मुंबई आने के बाद कुछ लोगों ने उन्हें प्लास्टिक सर्जरी कराने का सुझाव भी दिया, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया।
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ओम पुरी ने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में अभिनय की बारीकियां सीखीं। थिएटर ने उन्हें अपनी प्रतिभा को निखारने का मौका दिया। इसके बाद उन्होंने फिल्मों में काम करना शुरू किया और जल्द ही अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का ध्यान खींचा।
1983 में आई फिल्म 'अर्ध सत्य' उनके करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल रही। इसके अलावा 'आक्रोश', 'स्पर्श', 'मिर्च मसाला', 'जाने भी दो यारो' और 'हेराफेरी' जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग तरह के किरदार निभाए।
उनकी प्रतिभा भारत तक सीमित नहीं रही। 'सिटी ऑफ जॉय', 'ईस्ट इज ईस्ट' और 'द घोस्ट एंड द डार्कनेस' जैसी अंतरराष्ट्रीय फिल्मों में भी उन्होंने अभिनय किया।
ओम पुरी का सफर बताता है कि किसी कलाकार की पहचान केवल उसके चेहरे से तय नहीं होती। जिस रूप को लेकर वह कभी असहज थे, उसी चेहरे के भावों और दमदार अभिनय ने उन्हें दुनिया भर में पहचान दिलाई। 6 जनवरी 2017 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी फिल्में और यादगार किरदार आज भी दर्शकों के बीच जीवित हैं।
Location : Mumbai
Published : 18 October 2026, 11:45 AM IST