
प्रतीकात्मक छवि (Source Internet)
Jammu: जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और टेरर फंडिंग के खिलाफ कार्रवाई के बीच जम्मू की विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अदालत ने एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने 2022 के टेरर फंडिंग मामले में पाकिस्तान में रह रहे आतंकवादी मुश्ताक अहमद मीर को घोषित अपराधी करार दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, यह मामला अल-हुदा एजुकेशन ट्रस्ट (AHET) और प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (जम्मू-कश्मीर) की कथित गैरकानूनी गतिविधियों से जुड़ा है।
अधिकारियों के अनुसार, मुश्ताक अहमद मीर जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले की दरहाल तहसील के थानामंग गांव का रहने वाला है। बताया जाता है कि वह 1995-96 के दौरान आतंकवाद में शामिल होने के लिए नियंत्रण रेखा (LoC) पार कर पाकिस्तान चला गया था।
माना जाता है कि वह पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से अपनी गतिविधियां संचालित कर रहा है। टेरर फंडिंग मामले में अदालत की ओर से उसे घोषित अपराधी करार दिया जाना जांच और कानूनी कार्रवाई के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
यह मामला अल-हुदा एजुकेशन ट्रस्ट और प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी (जम्मू-कश्मीर) की कथित गैरकानूनी गतिविधियों से संबंधित है। एनआईए इस मामले में आतंकवाद से जुड़े वित्तीय नेटवर्क और संदिग्ध गतिविधियों की जांच कर रही है।
अदालत ने मामले में मुश्ताक अहमद मीर को घोषित अपराधी करार दिया है। हालांकि, इस फैसले को उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों में दोषसिद्धि के समान नहीं माना जाना चाहिए। घोषित अपराधी का दर्जा एक कानूनी प्रक्रिया के तहत दिया जाता है।
जम्मू स्थित विशेष एनआईए अदालत को राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम की धारा 11 के तहत जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विशेष अपराधों की सुनवाई के लिए नियुक्त किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गजट अधिसूचना एस.ओ. 4697(ई) के जरिए इस अदालत की नियुक्ति की थी।
जज प्रेम सागर इस विशेष अदालत के पीठासीन अधिकारी हैं। अदालत आतंकवाद से जुड़े मामलों की सुनवाई के साथ-साथ आरोपियों की जमानत याचिकाओं और संपत्ति जब्ती जैसे मामलों पर भी आदेश देती रही है।
साल 2026 के दौरान अदालत ने आतंकवाद से जुड़े कई मामलों में अहम आदेश दिए हैं। इनमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर से गतिविधियां संचालित करने के आरोपी पुंछ निवासी नजीर हुसैन को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 84 के तहत घोषित अपराधी करार देना भी शामिल है। उस पर सीमा पार आतंकवाद और ग्रेनेड तस्करी की साजिश से जुड़े आरोप हैं।
इसके अलावा, अदालत ने राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर शाह की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
2019 के पुलवामा आतंकी हमले की साजिश से जुड़े मामले में भी अदालत ने अगस्त और सितंबर 2026 के दौरान कई अंतरिम और नियमित जमानत याचिकाएं खारिज की थीं।
वहीं, सुंजवान आतंकी हमले के मामले में आरोपी शफीक अहमद शेख को अगस्त 2026 में अपनी बहन की शादी में शामिल होने के लिए अंतरिम जमानत नहीं दी गई। हालांकि, अदालत ने उसे कोट भलवाल जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शादी की रस्म देखने की अनुमति दी थी।
सितंबर 2026 में विशेष अदालत ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की धारा 33(1) के तहत आरोपी फयाज अहमद मीर की संपत्तियां जब्त करने का आदेश भी दिया था। जब्त की जाने वाली संपत्तियों में बारामूला जिले के बुमहामा गांव में स्थित आवासीय जमीन, व्यावसायिक दुकानें और कृषि भूमि शामिल हैं।
मुश्ताक अहमद मीर को घोषित अपराधी करार देने का ताजा फैसला जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और उससे जुड़े वित्तीय नेटवर्क के मामलों में जारी कानूनी कार्रवाई का हिस्सा है।
Location : New Delhi
Published : 15 October 2026, 8:50 AM IST
Topics : Mushtaq Ahmad Mir NIA court Jammu Pakistan based terrorist proclaimed offender terror funding case