सोना और चांदी की कीमतों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेज गिरावट, मजबूत डॉलर और बढ़ते तेल के दाम मुख्य कारण। जानें MCX और COMEX पर सोने-चांदी की वर्तमान स्थिति, विशेषज्ञों की राय और निवेशकों के लिए सुझाव।

सोने-चांदी की कीमत (Img: Google)
New Delhi: सोना और चांदी की कीमतों में मंगलवार को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेज गिरावट देखने को मिली। MCX पर सोने ने गैप-डाउन ओपनिंग की और 10 ग्राम के हिसाब से ₹1,38,411 से गिरकर ₹1,36,762 तक पहुंच गया। इसी दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार COMEX पर सोना लगभग 1.5% गिर गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, सोना और चांदी की कीमतों में गिरावट का मुख्य कारण मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ती महंगाई की चिंताएं हैं। भले ही अमेरिका-ईरान तनाव में थोड़ी कमी आई हो, लेकिन बाजार मान रहा है कि फेडरल रिजर्व और अन्य केंद्रीय बैंक फिलहाल ब्याज दरों में कटौती नहीं करेंगे। इसके चलते निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों जैसे सोने से दूर हो रहे हैं।
WTI कच्चे तेल की कीमतों में तेजी भी सोने पर दबाव डाल रही है। तेल की कीमतें 4% से अधिक बढ़कर $91 प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं, जिससे अमेरिकी डॉलर मजबूत हुआ। डॉलर इंडेक्स 99 के आसपास रहा, जिससे कीमती धातुओं की मांग कमजोर हुई।
COMEX पर चांदी की कीमतें 2.5% से अधिक गिर गईं। घरेलू बाजार में भी चांदी की कीमतें दबाव में रही। विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल सुरक्षित निवेश की बजाय जोखिम भरे, उच्च रिटर्न वाले विकल्पों की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।
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LKP सिक्योरिटीज के विशेषज्ञ जतिन त्रिवेदी के अनुसार, MCX सोना ₹1,28,000 से ₹1,40,000 के रेंज में रह सकता है। यदि सोना ₹1,40,000 के ऊपर ब्रेकआउट करता है तो यह ₹1,45,000–₹1,50,000 तक जा सकता है। वहीं, यदि ₹1,28,000 से नीचे गिरता है तो कीमत ₹1,20,000 तक आ सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। इसलिए निवेशकों को सावधानीपूर्वक निर्णय लेने और बड़े निवेश करते समय विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है।
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विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भू-राजनीतिक तनाव कम होता है और ब्याज दरों के संबंध में स्पष्टता आती है, तो सोना तेज़ी से उबर सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना $5,000 प्रति औंस तक पहुंच सकता है। कुल मिलाकर, वैश्विक आर्थिक कारक और बाजार की उम्मीदें सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के मुख्य कारण हैं। आने वाले दिनों में निवेशक डॉलर, तेल की कीमतों और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर नजर बनाए रखेंगे।