रुद्रप्रयाग के अगस्त्यमुनि में गुरुवार को स्थानीय लोगों और प्रशासन के बीच तनातनी का माहौल हो गया। मकर संक्रांति के पावन पर्व पर केदारनाथ हाईवे पर अगस्तमुनि में अगस्त्य ऋषि की डोली ने जमकर तांडव मचाया। स्थानीय लोगों ने गेट का ऊपरी हिस्सा तोड़ डाला, तब जाकर डजोली भीतर प्रवेश कर पाई।

अगस्त्यमुनि में मुनि महाराज के मैदान
Rudraprayag: अगस्त्यमुनि में गुुरुवार को मुनि महाराज की डोली को लेकर हंगामा मच गया है। मकर संक्रांति पर्व पर निकली मुनि महाराज की ऐतिहासिक डोली यात्रा अगस्त्यमुनि मैदान का गोल गेट होने से डोली ने प्रवेश नहीं किया जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर लंबा जाम लग गया।
जानकारी के अनुसार डोली को मंदिर से रवाना होकर मुनि महाराज के मैदान अगस्त्यमुनि में जाना था, जहां सैकड़ों की संख्या में भक्त डोली का इंतजार कर रहे थे, लेकिन मैदान का गोल गेट होने से डोली ने अंदर प्रवेश नहीं किया। स्थानीय लोगों ने गेट का ऊपरी हिस्सा तोड़ डाला, तब जाकर डोली भीतर प्रवेश कर पाई।
गौरतलब है कि 15 सालों बाद अगस्त्य ऋषि की डोली यात्रा का आयोजन किया गया था। अगस्त्यमुनि मैदान का गोल गेट नहीं तोड़े जाने पर बुधवार को डोली ने प्रवेश करने से मना कर दिया था। गुरुवार को डोली मैदान में प्रवेश करने के लिए फिर पहुंची, लेकिन गेट न तोड़े जाने को लेकर डोली प्रवेश नहीं कर पाई। जिसके बाद भक्तों में आक्रोश फ़ैल गया। इसके बाद स्थानीय लोगों ने खुद ही दिवार पर चढ़कर हथोड़े से गेट तोड़ दिया।
डोली समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि 15 सालों बाद दिवारा यात्रा का आयोजन किया गया, जिसको लेकर प्रशासन को पहले ही सूचना दी गई थी, मगर प्रशासन ने मामले में कोई कार्यवाही नहीं की। जिस कारण मुनि महाराज को केदारनाथ हाईवे पर आक्रोश दिखाना पड़ा। करीब छः घंटे बाद डोली के वापस मंदिर जाने पर राजमार्ग खुल पाया और लोगों ने राहत की सांस ली।
करीब छः घंटे बाद डोली के वापस मंदिर जाने पर राजमार्ग खुल पाया और लोगों ने राहत की सांस ली।
मुनि महाराज की डोली
इस दौरान जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन की टीम मौके पर मौजूद थी। प्रशासन का कहना है कि मंदिर समिति को वार्ता के लिए बुला गया था लेकिन मंदिर समिति का कोई भी व्यक्ति वार्ता के लिए नहीं आया। वही मंदिर समिति का कहना है कि समिति द्धारा पूर्व में ही जिला प्रशासन को बता दिया गया था लेकिन कोई संज्ञान नहीं लिया। जिससे ये समस्या सामने आयी। आज स्वंय लोगों ने गेट तोडना शुरू कर दिया है।
समिति का कहना है कि जिला प्रशासन जबरदस्ती मुनि महाराज के गौचरान भूमि पर कब्जा और खेल मैदान बनाना चाहता हैं जो नहीं होने दिया जायेगा।