Magh Mela 2026: माघ मेला प्रयागराज में ही क्यों लगता है? जानिए आस्था, इतिहास और पौराणिक रहस्य

माघ मेला 2026 प्रयागराज में 3 जनवरी से 15 फरवरी तक आयोजित होगा। जानिए माघ मेला प्रयागराज में ही क्यों लगता है, इससे जुड़ी पौराणिक मान्यताएं, प्रमुख स्नान तिथियां और कल्पवास का महत्व। संगम स्नान से पाप मुक्ति और पुण्य लाभ की धार्मिक मान्यता है।

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 16 January 2026, 1:12 PM IST

Prayagraj: माघ मेले को हिंदू धर्म में आस्था, साधना और पुण्य प्राप्ति का सबसे पवित्र अवसर माना जाता है। साल 2026 में माघ मेला 3 जनवरी से 15 फरवरी तक प्रयागराज में आयोजित होगा। मान्यता है कि माघ मास में संगम में स्नान करने से व्यक्ति को जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है और तन-मन दोनों स्वस्थ रहते हैं।

लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि माघ मेला हर साल प्रयागराज में ही क्यों लगता है? इसके पीछे धार्मिक, पौराणिक और आध्यात्मिक कारण जुड़े हुए हैं, जिनका उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में मिलता है।

प्रयागराज से जुड़ा पौराणिक रहस्य

मत्स्य पुराण और पद्म पुराण के अनुसार, सृष्टि के आरंभ में भगवान ब्रह्मा ने धरती पर पहला अश्वमेध यज्ञ प्रयागराज में ही कराया था। इसी यज्ञ के कारण इस स्थान को विशेष महत्व प्राप्त हुआ। प्रयागराज शब्द का संधि-विच्छेद करें तो प्रथम + यज्ञ = प्रयाग अर्थात वह स्थान जहां पहला यज्ञ हुआ। यही कारण है कि प्रयागराज को तीर्थराज भी कहा जाता है।

माघ मेला प्रयागराज में ही क्यों होता है?

पौराणिक कथाओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत का कलश निकला, तो देवताओं और असुरों के बीच उसे पाने के लिए संघर्ष हुआ। इस दौरान अमृत की चार बूंदें धरती पर गिरीं, जो हरिद्वार,  उज्जैन, नासिक और प्रयागराज में गिरीं। मान्यता है कि माघ मास में प्रयागराज के त्रिवेणी संगम का जल अमृत के समान हो जाता है। इसी कारण यहां किया गया स्नान अत्यंत फलदायी माना जाता है। यही वजह है कि हर साल माघ मेले का आयोजन प्रयागराज में ही किया जाता है।

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माघ मेला 2026 के प्रमुख स्नान पर्व

माघ मेले के दौरान कुछ विशेष तिथियों पर स्नान का अलग महत्व होता है:

  • पौष पूर्णिमा: 3 जनवरी 2026 (शनिवार)
  • मकर संक्रांति: 14 जनवरी 2026 (बुधवार)
  • मौनी अमावस्या: 18 जनवरी 2026 (रविवार)
  • बसंत पंचमी: 23 जनवरी 2026 (शुक्रवार)
  • माघी पूर्णिमा: 1 फरवरी 2026 (रविवार)
  • महाशिवरात्रि: 15 फरवरी 2026 (रविवार)

इन दिनों संगम स्नान को विशेष पुण्यदायी माना गया है।

कल्पवास का विशेष महत्व

माघ मेले के दौरान प्रयागराज के संगम तट पर कल्पवास की परंपरा निभाई जाती है। कल्पवास में श्रद्धालु और साधु-संत एक निश्चित अवधि तक संगम के पास रहकर

  • संयमित जीवन
  • सात्विक भोजन
  • तप, जप और साधना

का पालन करते हैं। मान्यता है कि कल्पवास करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है और आत्मिक शुद्धि होती है।

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आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम

माघ मेला सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था और परंपरा का जीवंत उदाहरण है। यही वजह है कि हर साल लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से प्रयागराज पहुंचते हैं और संगम में आस्था की डुबकी लगाते हैं।

Location : 
  • Prayagraj

Published : 
  • 16 January 2026, 1:12 PM IST