मेरठ में बेटी का अपहरण और मां की हत्या: कपसाड़ कांड में अखिलेश यादव की एंट्री, सपा विधायक अतुल प्रधान का दिखा आक्रोशित रूप

सरधना के कपसाड़ गांव में अपहृत युवती रूबी का दूसरे दिन भी कोई सुराग नहीं मिला। मां की हत्या के बाद शव रखकर बैठे परिजनों ने 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया, तब जाकर अंतिम संस्कार हुआ।

Post Published By: Mayank Tawer
Updated : 10 January 2026, 3:12 AM IST

Meerut: मां की लाश, लापता बेटी और इंसाफ की जिद...सरधना के कपसाड़ गांव में शुक्रवार को पूरा दिन गम, गुस्से और तनाव के बीच गुजरा। एक तरफ अपहृत युवती रूबी का कोई सुराग नहीं और दूसरी तरफ मां सुनीता का शव घर में रखकर बैठा परिवार। हालात इतने बिगड़े कि पूरा गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो गया और हर पल माहौल फूट पड़ने की कगार पर रहा।

दूसरे दिन भी नहीं मिला रूबी का पता

सरधना के कपसाड़ गांव से अपहृत युवती रूबी का शुक्रवार को भी कोई सुराग नहीं लग सका। नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी भी नहीं हो पाई, जिससे परिजनों और ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ गया। बृहस्पतिवार रात करीब 12 बजे सुनीता का शव गांव पहुंचते ही कोहराम मच गया था। परिजनों ने साफ कह दिया था कि जब तक बेटी बरामद नहीं होगी, अंतिम संस्कार नहीं होगा।

गांव बना छावनी, दिनभर हंगामा

शुक्रवार सुबह से ही गांव और आसपास के इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा। सपा, बसपा, भीम आर्मी, आसपा के नेता और स्थानीय लोग लगातार मौके पर डटे रहे। पुलिस-प्रशासन और परिजनों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन हर बार मामला अटकता रहा। कई बार अफसरों और ग्रामीणों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई और हालात हिंसक होने के करीब पहुंच गए।

आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए

एडीएम वित्त सूर्यकांत त्रिपाठी 10 लाख रुपये का चेक लेकर पहुंचे, लेकिन सुनीता के पिता सतेंद्र, बेटे मनदीप और नरसी ने इसे लेने से इनकार कर दिया। परिवार की एक ही मांग थी- रूबी को जिंदा बरामद किया जाए और आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए। इसी बीच नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने वीडियो कॉल कर पीड़ित परिवार से बात की।

राजनीतिक दखल और समझौता

विधायक अतुल प्रधान ने पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से पीड़ित परिवार की फोन पर बात कराई। अखिलेश यादव ने 3 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की बात कही। देर शाम एसपी देहात अभिजीत कुमार, एडीएम सिटी बृजेश सिंह, एसडीएम उदय नारायण सेंगर और भाजपा के पूर्व विधायक संगीत सोम मौके पर पहुंचे। प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन दिया गया कि 48 घंटे के भीतर रूबी को बरामद किया जाएगा।

इन मांगों पर बनी सहमति

प्रशासन ने 10 लाख रुपये का मुआवजा, परिवार के एक सदस्य को नौकरी, शस्त्र लाइसेंस, गांव में सुरक्षा और आरोपियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया। इसके बाद शाम करीब पौने आठ बजे सुनीता का अंतिम संस्कार हुआ। बेटे नरसी ने मुखाग्नि दी।

तनाव बरकरार, तलाश जारी

अंतिम संस्कार के बाद भी गांव में तनाव कायम है। पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटे में रूबी नहीं मिली तो आंदोलन फिर तेज किया जाएगा।

ये है पूरा मामला

बृहस्पतिवार सुबह सुनीता अपनी बेटी रूबी के साथ खेत जा रही थी, तभी गांव के ही पारस सोम, सुनील और उनके साथियों ने हमला कर दिया। सुनीता पर फरसे से वार कर उनकी हत्या कर दी गई और रूबी का अपहरण कर आरोपी फरार हो गए। इलाज के दौरान मोदीपुरम के एसडीएस अस्पताल (SDS Hospital) में सुनीता की मौत हो गई थी।

Location : 
  • Meerut

Published : 
  • 10 January 2026, 3:12 AM IST