राजस्थान सरकार पुलिसिंग में उर्दू शब्दों की जगह हिंदी शब्दों का करेगी इस्तेमाल

मुकद्दमा (मामला), मुल्ज़िम (आरोपी), इल्ज़ाम (आरोप), इत्तिला (सूचना), चश्मदीद (प्रत्यक्षदर्शी) और ऐसे कई शब्द राजस्थान में पुलिसिंग शब्दावली का हिस्सा नहीं रह गए हैं। पढ़िए डाइनामाइट न्यूज़ की पूरी रिपोर्ट

Post Published By: डीएन ब्यूरो
Updated : 18 December 2024, 5:15 PM IST

जयपुर: मुकद्दमा (मामला), मुल्ज़िम (आरोपी), इल्ज़ाम (आरोप), इत्तिला (सूचना), चश्मदीद (प्रत्यक्षदर्शी) और ऐसे कई शब्द राजस्थान में पुलिसिंग शब्दावली का हिस्सा नहीं रह गए हैं, क्योंकि राज्य की भाजपा सरकार ने इन्हें उचित हिंदी शब्दों से बदलने का निर्देश जारी किया है।

राज्य पुलिस मुख्यालय ने यह कवायद गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बेधम द्वारा ऐसे शब्दों और उनके हिंदी विकल्पों के बारे में जानकारी मांगने के बाद शुरू की है।

पत्र के बाद राज्य पुलिस प्रमुख यू आर साहू ने पिछले महीने अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) को पत्र लिखकर उर्दू शब्दों का विवरण एकत्र करने और उनके उचित विकल्प खोजने के लिए कहा था।

पुलिस अधिकारी ने बताया, "पीएचक्यू (पुलिस मुख्यालय) से मिले निर्देशों के अनुपालन में एसपी को उर्दू शब्दों और उनके हिंदी प्रतिस्थापन के बारे में जानकारी एकत्र करने के लिए कहा गया है।"कांग्रेस पार्टी ने इस कदम को लेकर सरकार की आलोचना की और इसे अनुचित बताया।उन्होंने कहा, "राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति खराब हो रही है, लेकिन राज्य सरकार को इसकी कोई चिंता नहीं है। लंबे समय से चलन में रहे शब्दों को बदलने के बजाय सरकार को अपराध को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था को बहाल करने के लिए प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।" पुलिस में कई शब्द आम तौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं, जैसे मुकद्दमा (मामला), मुल्ज़िम (आरोपी), मुस्तगिस (शिकायतकर्ता), इल्ज़ाम (आरोप), इत्तिला (सूचना), चश्मदीद (चश्मदीद गवाह), जेब तराशी (जेब काटना), फर्द बारामदगी (वसूली ज्ञापन) आदि।

Published : 
  • 18 December 2024, 5:15 PM IST