Makar Sankranti 2026: स्नान-दान से आगे कुछ और संकेत दे रही है मकर संक्रांति, क्या आप जानते हैं?

सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ उत्तरायण शुरू हो चुका है, लेकिन इस बार मकर संक्रांति साधारण नहीं मानी जा रही। मकर संक्रांति केवल परंपराओं तक सीमित नहीं है। ज्योतिष और आध्यात्मिक दृष्टि से यह दिन आने वाले समय के संकेत देता है।

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 15 January 2026, 11:38 AM IST

New Delhi: मकर संक्रांति हिंदू पंचांग का एक प्रमुख पर्व है, जो सूर्य के मकर राशि में प्रवेश और उत्तरायण की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व अनुशासन, संयम और जागरूक जीवन शैली से जुड़ा हुआ है। अन्य त्योहारों की तरह इसकी तिथि में अधिक बदलाव नहीं होता, क्योंकि यह सूर्य की खगोलीय स्थिति पर आधारित है। वर्ष 2026 में मकर संक्रांति 14 और 15 जनवरी को मनाई जा रही है, जिसका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व विशेष माना जा रहा है।

इस वर्ष मकर संक्रांति का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह एकादशी तिथि से जुड़ रही है। एकादशी को संयम, सादगी और आत्मनियंत्रण का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि मकर संक्रांति को केवल उत्सव नहीं, बल्कि शांत आचरण, नियमित जीवन और सोच-समझकर लिए गए निर्णयों का पर्व माना जाता है।

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पुण्य काल और महा पुण्य काल का समय

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के बाद का समय पुण्य काल कहलाता है। इस दौरान किया गया स्नान, दान और पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। 15 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति का पुण्य काल सुबह 7:15 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक रहेगा। इस अवधि में स्नान और दान करने से मन की स्थिरता, संतुलन और स्पष्टता प्राप्त होने की मान्यता है। यह समय बाहरी दिखावे से अधिक आंतरिक शुद्धता पर जोर देता है।

ज्योतिष में मकर संक्रांति का महत्व

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को व्यवस्था, जिम्मेदारी और दिशा का कारक माना गया है। मकर राशि पर शनि का शासन होता है, जो अनुशासन, धैर्य और संरचना का प्रतीक ग्रह है। जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, तो भावनाओं की तुलना में कर्तव्य, योजना और दीर्घकालिक प्रयासों पर ध्यान केंद्रित होता है।
वर्ष 2026 के लिए पारंपरिक ज्योतिषीय संकेतों के अनुसार यह समय व्यवस्था और संगठन पर ध्यान बढ़ाने, संसाधनों में संतुलन, स्वास्थ्य दिनचर्या के प्रति जागरूकता और धैर्य की परीक्षा का संकेत देता है। हालांकि ये संकेत सामान्य प्रवृत्तियां हैं, इन्हें निश्चित भविष्यवाणी नहीं माना जाना चाहिए।

मकर संक्रांति का आध्यात्मिक अर्थ

मकर संक्रांति धीरे-धीरे आने वाले सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है। इस समय दिन लंबे होने लगते हैं, प्रकाश बढ़ता है और ठंड कम होने लगती है। आध्यात्मिक रूप से यह पर्व मानसिक भारीपन से बाहर आने और निरंतर प्रयास को अपनाने की प्रेरणा देता है। यह दिन जुड़ा है पुरानी आदतों को छोड़ने, मानसिक उलझनों को साफ करने और जागरूक होकर कर्म करने से।

मकर संक्रांति पर स्नान का महत्व

मकर संक्रांति पर स्नान को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। परंपरागत रूप से लोग गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। यह स्नान केवल शारीरिक शुद्धता के लिए नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक नवीकरण का माध्यम माना जाता है। जो लोग यात्रा नहीं कर सकते, वे घर पर स्नान कर सकते हैं। कई लोग पानी में तिल या गंगाजल मिलाते हैं, हालांकि असली महत्व भावना का होता है।

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दान का विशेष महत्व

मकर संक्रांति पर दान को संतुलन और विनम्रता का प्रतीक माना गया है। इस दिन तिल, गुड़, अनाज, गर्म कपड़े, कंबल, घी, तेल और बर्तनों का दान किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे भाव से किया गया दान मानसिक शांति, स्थिरता और दीर्घकालिक संतुलन प्रदान करता है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। डाइनामाइट न्यूज़ इसकी सटीकता या पुष्टि का दावा नहीं करता। किसी भी धार्मिक उपाय को अपनाने से पहले योग्य विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।

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  • 15 January 2026, 11:38 AM IST