भारत में कई भव्य सूर्य मंदिर हैं, जो केवल पूजा स्थल नहीं बल्कि कला, विज्ञान और वास्तुकला का अद्भुत संगम हैं। कोणार्क, मोढेरा, मार्तंड, कटारमल और ग्वालियर के सूर्य मंदिर इतिहास, रहस्य और आध्यात्मिक अनुभव का प्रतीक हैं।

पुरी जिले में स्थित कोणार्क सूर्य मंदिर 13वीं शताब्दी में राजा नरसिंह देव ने बनवाया। मंदिर रथ के आकार का है, जिसमें 12 विशाल पहिए और 7 घोड़े हैं। वास्तुकला और नक्काशी इतनी जीवंत है कि हर मूर्ति जीवन जैसी प्रतीत होती है। इसे यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा भी प्राप्त है। (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
गुजरात के पाटन जिले में स्थित मोढेरा सूर्य मंदिर 11वीं शताब्दी में बना। मंदिर के गर्भगृह पर साल में दो बार सूर्य की किरण सीधे पड़ती है। तीन मुख्य भाग हैं – गर्भगृह, सभा मंडप और सूर्य कुंड। 108 छोटे मंदिर और सुंदर नक्काशियों से मंदिर परिसर अद्वितीय बनता है। (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
अनंतनाग जिले में स्थित मार्तंड सूर्य मंदिर 8वीं शताब्दी में राजा ललितादित्य द्वारा बनवाया गया। खंडहर में बदल चुका यह मंदिर अपने विशाल स्तंभ, भव्य मेहराब और मजबूत दीवारों से ऐतिहासिक और स्थापत्य गौरव दिखाता है। चारों ओर घाटियों का सुंदर दृश्य इसे और खास बनाता है। (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
अल्मोड़ा जिले में समुद्र तल से 2,116 मीटर की ऊंचाई पर स्थित कटारमल सूर्य मंदिर 9वीं शताब्दी में कत्यूरी राजा द्वारा बनवाया गया। परिसर में सूर्य देव के अलावा 44 छोटे मंदिर हैं। बारीक पत्थर की नक्काशी, पहाड़ों से घिरा वातावरण और शांति इसे आध्यात्मिक अनुभव बनाते हैं। (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
ग्वालियर में स्थित यह मंदिर 1988 में उद्योगपति गोपालदास नीरज द्वारा बनवाया गया। ओडिशा के कोणार्क मंदिर से प्रेरित इसकी डिजाइन पारंपरिक उत्तर भारतीय नागर शैली में है। मंदिर की दीवारों पर देवी-देवताओं की मूर्तियां उकेरी गई हैं। यह शहर के बीच में होने के बावजूद शांति और श्रद्धा का अनुभव देता है। (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
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