
आंवला नवमी क्यों मनाई जाती है?
New Delhi: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला नवमी या अक्षय नवमी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु का आंवले के वृक्ष में वास होता है। पद्म पुराण में भी इसका उल्लेख मिलता है, जिसमें कहा गया है कि आंवला नवमी के दिन विधिपूर्वक पूजा करने से गोदान के समान फल प्राप्त होता है।
पंचांग के अनुसार कार्तिक शुक्ल नवमी तिथि 30 अक्टूबर 2025 सुबह 10:06 बजे से शुरू होकर 31 अक्टूबर सुबह 10:03 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार इस वर्ष आंवला नवमी 31 अक्टूबर 2025 (शुक्रवार) को मनाई जाएगी।
पूजन का शुभ मुहूर्त सुबह 06:37 बजे से 10:04 बजे तक रहेगा। कुल मिलाकर पूजा के लिए 3 घंटे 25 मिनट का समय शुभ रहेगा।
आंवला नवमी
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार माता लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण के लिए आईं। उन्होंने देखा कि लोगों के जीवन में दरिद्रता और कष्ट बढ़ गए हैं। उन्होंने मन में विचार किया कि यदि वे भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की एक साथ पूजा करें तो संसार की दरिद्रता दूर हो सकती है।
ध्यान और चिंतन के बाद उन्हें ज्ञात हुआ कि आंवले का वृक्ष ही ऐसा स्थान है, जहां तुलसी और बेल—दोनों की पवित्रता एक साथ विद्यमान है। तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय है और बेलपत्र भगवान शिव को। इसलिए माता लक्ष्मी ने आंवले के वृक्ष की पूजा आरंभ की।
उन्होंने जल अर्पित किया, दीप जलाया और दोनों देवताओं का ध्यान किया। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु और भगवान शिव प्रकट हुए और उन्हें आशीर्वाद दिया कि “जो भी भक्त श्रद्धा से आंवले के वृक्ष की पूजा करेगा, उसके घर में कभी दरिद्रता नहीं आएगी और उसे मोक्ष की प्राप्ति होगी।”
इसके बाद से हर वर्ष कार्तिक शुक्ल नवमी के दिन भक्त आंवले के वृक्ष की पूजा करते हैं और इसे अक्षय नवमी के रूप में मनाते हैं।
आंवला नवमी को देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ दिन माना गया है। इस दिन व्रत और दान करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है। शास्त्रों के अनुसार, आंवले का वृक्ष न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि आयुर्वेदिक रूप से भी स्वास्थ्य का स्रोत है।
Location : New Delhi
Published : 31 October 2025, 11:33 AM IST
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