इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 के अनुसार 2025 में सोने की कीमतों में ऐतिहासिक तेजी दर्ज की गई। कमजोर डॉलर, भू-राजनीतिक तनाव और नेगेटिव रियल रेट्स ने गोल्ड को सेफ हेवन बनाया। जानिए आगे क्या संकेत हैं।

सोना (Img Source: Google)
New Delhi: इकोनॉमिक सर्वे 2025-26 में सोने की कीमतों को लेकर बड़ा खुलासा किया गया है। भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन के मुताबिक, साल 2025 में गोल्ड प्राइस में ऐतिहासिक उछाल देखने को मिला है। वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता, कमजोर अमेरिकी डॉलर और भू-राजनीतिक तनावों के बीच सोना एक बार फिर निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरा है।
सर्वे के अनुसार, 2025 के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें 2,607 डॉलर प्रति औंस से बढ़कर 4,315 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गईं। वहीं 26 जनवरी तक गोल्ड का भाव 5,101.34 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर दर्ज किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि नकारात्मक वास्तविक ब्याज दरों की आशंका और वैश्विक जोखिमों ने सोने को एक मजबूत सेफ-हेवन एसेट बना दिया।
भारत में भी सोने की कीमतों में इसी तरह की तेजी देखने को मिली। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर 30 जनवरी को सोना 81,028 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता दिखा, जबकि 29 जनवरी 2026 को यह बढ़कर 1,75,231 रुपये प्रति 10 ग्राम तक पहुंच गया। इस दौरान निवेशकों को करीब 116 प्रतिशत का रिटर्न मिला।
हालांकि, इकोनॉमिक सर्वे जारी होने के बाद बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिली। MCX पर सोने की कीमतों में करीब 4.87 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और भाव फिसलकर 1,67,095 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। इसका असर गोल्ड ईटीएफ पर भी पड़ा। Axis Gold ETF, Union Gold ETF और 360 One Gold ETF जैसी स्कीमों में 10 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई।
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इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि 2025 की पहली छमाही में अमेरिका द्वारा घोषित टैरिफ नीतियों ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ाई। इसके चलते निवेशकों का भरोसा डॉलर से हटकर सोने जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर गया, जिससे गोल्ड की कीमतों को मजबूत समर्थन मिला।
रिपोर्ट के मुताबिक, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ब्याज दर चक्र में बदलाव के चलते कई उभरते देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। भारत में भी यही रुझान देखने को मिला। जनवरी 2026 तक भारत का गोल्ड रिजर्व बढ़कर 117.5 अरब डॉलर हो गया, जो मार्च 2025 में 78.2 अरब डॉलर था।
सोने की बढ़ती कीमतों का सीधा असर भारत के आयात बिल पर पड़ा है। FY25 में गोल्ड इंपोर्ट में 27.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि कीमतों में सालाना आधार पर 38.2 प्रतिशत का उछाल आया। इसके साथ ही गोल्ड लोन में भी 125.3 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जो घरेलू वित्तीय दबाव को दर्शाती है।
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इकोनॉमिक सर्वे का अनुमान है कि जब तक वैश्विक अनिश्चितता, ट्रेड वॉर और भू-राजनीतिक तनाव बने रहेंगे, तब तक सोना और चांदी निवेशकों के लिए आकर्षक बने रहेंगे। हालांकि, यदि वैश्विक स्तर पर स्थायी शांति और व्यापार विवादों का समाधान होता है, तो सोने की तेजी की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।