
नई दिल्ली: पौराणिक दृष्टि से देखें तो इसी दिन त्रेता युग का आरंभ हुआ था, जिस कारण इस तिथि को आदि तिथि भी कहते हैं, साथ ही इसी तिथि में भगवान विष्णु के 24 अवतारों में 16 वाँ अवतार भगवान श्री परशुराम का हुआ था।
इस दिन बनने वाला योग व मुहुर्त स्वयं सिद्ध होता है, जिसमें बिना किसी संशय के विवाह, उपनयन, गृह प्रवेश आदि कोई भी मांगलिक कार्य कर सकते हैं। उदया तिथि व रोहिणी वैसे तो तृतीया तिथि 25 तारीख शनिवार को ही आरंभ हो रहा है परंतु उदया तिथि रविवार को मिलने के कारण पुण्यकाल रविवार के दिन प्रातः काल से लेकर मध्याह्न अर्थात् 12.05 मिनट तक रहेगा।
लॉकडाउन में घर पर रहकर ऐसे उठाएं लाभ
अक्षय तृतीया के दिन सोना खरीदने का विशेष महत्व है परंतु लॉकडाउन के चलते आप कोई भी खरीददारी नहीं कर सकेंगे इसलिए अपने घर पर ही रहकर प्रातः काल स्नान आदि से निवृत्त होकर श्री लक्ष्मीनारायण का विग्रह या चित्र रखें, घी का पांच दीपक जलाएं और कोई भी स्वर्ण आभूषण व पांच सिक्कों को गंगा जल व पंचामृत से स्नान कराकर फिर उन्हें पीले कपडे़ में बाँधकर लक्ष्मीनारायण के चरणों में निवेदित करें, भगवान विष्णु को पीला पुष्प, पीला वस्त्र व पीला फल आदि अर्पित करें व पंचामृत का भोग लगाएं।
माँ लक्ष्मी को कमल, गुलाब या लाल पुष्प निवेदित करें व खीर का भोग लगाएं व सपरिवार आरती गायन व प्रसाद ग्रहण करें। अगले दिन उन सिक्कों को तिजोरी या गल्ले में रखें व आभूषण को यथास्थान रखें। जय श्री राधे
(लेखक पंडित विकास मालवीय, युवा ज्योतिषाचार्य हैं। इन्होंने ज्योतिषीय शिक्षा सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी से ग्रहण की है)
Published : 24 April 2020, 11:44 AM IST
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