Naag Panchami 2025: नाग पंचमी पर करें ये उपाय, जानें शुभ मुहूर्त, तिथि, पूजा विधि और महत्व

नाग पंचमी 2025 का पर्व 29 जुलाई को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जाएगा। इस दिन नाग देवता की विधिवत पूजा कर कालसर्प दोष, सर्पदंश और भय से मुक्ति की कामना की जाती है। जानिए इस पर्व की सटीक तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व।

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 29 July 2025, 7:46 AM IST

New Delhi: हिन्दू धर्म में नाग पंचमी का पर्व विशेष महत्व रखता है। यह पर्व हर वर्ष श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2025 में यह शुभ दिन 29 जुलाई, मंगलवार को पड़ रहा है। इस दिन श्रद्धालु नाग देवता की पूजा-अर्चना करते हैं और उनसे सुरक्षा, समृद्धि तथा रोग-मुक्त जीवन की कामना करते हैं।

माना जाता है कि नाग पंचमी पर नागों की पूजा करने से कालसर्प दोष, सर्पदंश और सर्प भय जैसे कष्टों से मुक्ति मिलती है। यह पर्व विशेष रूप से भारत के उत्तर भारत, महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में बड़े उत्साह से मनाया जाता है।

नाग पंचमी 2025 की तिथि

नाग पंचमी की पंचमी तिथि 28 जुलाई की रात 11:24 बजे से आरंभ होकर 30 जुलाई की रात 12:46 बजे तक रहेगी। लेकिन चूंकि पंचमी का उदय 29 जुलाई को सुबह है, इसलिए इसी दिन नाग पंचमी व्रत और पूजा की जाएगी।

शुभ मुहूर्त

इस दिन पूजा का उत्तम समय सुबह 5:41 बजे से 8:23 बजे तक का है। इस मुहूर्त में नाग देवता की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस काल में पूजा करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

नाग पंचमी की पूजा विधि

  • सबसे पहले सुबह ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • गाय के गोबर से घर के बाहर या पूजा स्थान पर नाग का चित्र बनाएं या मिट्टी की नाग प्रतिमा स्थापित करें।
  • नाग देवता का ध्यान करते हुए उनका आवाहन करें।
  • व्रत रखने का संकल्प लें।
  • दूध, दही, शहद, अबीर, गुलाल, फूल, अक्षत, चंदन, मेहंदी आदि से नाग देवता की पूजा करें।
  • विशेष रूप से नाग पंचमी के मंत्रों का जाप करें।
  • पूजा के बाद प्रसाद बांटें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

नाग पंचमी का धार्मिक महत्व

नाग पंचमी के दिन नाग देवता की आराधना करने से जीवन की तमाम बाधाएं दूर होती हैं। विशेष रूप से कालसर्प दोष से पीड़ित जातकों को इस दिन व्रत व पूजा करने से लाभ होता है। इसके अलावा यह पर्व प्रकृति और जीवों के सम्मान का प्रतीक भी माना जाता है। सर्प को आध्यात्मिक शक्ति और कुंडलिनी शक्ति का प्रतिनिधि माना जाता है, इसलिए इनकी पूजा से मानसिक और आध्यात्मिक विकास भी होता है।

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  • 29 July 2025, 7:46 AM IST