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जबसे राहुल गांधी कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर गये हैं तबसे ही वे चर्चा में छाये हुए हैं। यात्रा समाप्त करने के तुरंत बाद वे भारत बंद के नाम पर राजघाट पहुंचे और देखिये कैसे अपनी यात्रा को बापू से कनेक्ट कर डाला। डाइनामाइट न्यूज़ की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में जानें इसके निहितार्थ..
नई दिल्लीः कांग्रेस ने सोमवार को लगातार बढ़ रही मंहगाई व रुपए की घटती वैल्यू को लेकर केंद्र के खिलाफ भारत बंद का ऐलान किया। कांग्रेस को भारत बंद में 20 से ज्यादा पार्टियों का साथ मिला है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौटकर सीधे भारत बंद में शिरकत कर रहे हैं।
सोमवार को भारत बंद का आदाज करने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद व अन्य कार्यकर्ताओं के साथ राजघाट में बापू की समाधि स्थल पर गए और वहां उन्हें पहले श्रद्धांजलि दी। इस दौरान वहां राहुल गांधी ने अपनी जेब से एक बोतल निकाली और उसमें रखे कैलाश मानसरोवर से लाए गए जल को बापू की समाधि स्थल पर चढ़ाया।
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कांग्रेस अध्यक्ष ने मानसरोवर के जल का कुछ हिस्सा बापू की समाधि पर रखा। इसके बाद वे भारत बंद के ऐलान के साथ रामलीला मैदान के लिए कूच कर गए, जहां उन्होंने विशाल रैली को संबोधित किया।
राहुल गांधी का कैलाश मानसरोवर यात्रा का बापू से ये हो सकता है कनेक्शन
1. राजघाट पहुंचकर भारत बंद की शुरुआत से पहले बापू की समाधि पर कैलाश मानसरोवर से लाए जल को चढ़ाने के पीछे कई मतलब निकल रहे हैं।
2. महात्मा गांधी को जनता से संवाद स्थापित करने और लोगों को अपने एजेंडे पर सोचने पर मजबूर करने की कला बखूबी आती थी। आज गांधी के सत्तर साल गुजरने के बाद भी राहुल गांधी और कांग्रेस को उनकी सख्त जरूरत है।

3. कांग्रेस के भारत बंद में मीडिया व सोशल मीडिया के अलावा जनता का भी काफी साथ मिल रहा है। वहीं गांधीजी के समय सोशल मीडिया बेशक नहीं था लेकिन जनता से उनका जुड़ाव आजादी से लेकर अब तक सभी राजनेताओं से श्रेष्ठ रहा है। इसिलए हो सकता है कि राहुल भी महात्मा गांधी जी की तरह सत्ता नहीं बल्कि मर्यादा और इंसानियत की फ्रिक कर रहे हो। जिससे उन्हें देश और समाज का साथ मिल सके।
4. भाजपा जो कि गांधी की विचारधारा की विरोधी रही उसने गांधीवाद को अपनाकर बहुसंख्यकों को मुस्लिम तुष्टिकरण के विरोध के नाम पर अपनी तरफ खींच लिया। इससे भाजपा ने 2014 में न सिर्फ कांग्रेस को सत्ता से बाहर किया बल्कि अब कांग्रेस की वापसी 2019 में भी मुश्किल दिखाई दे रही है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अब राहुल गांधी को बापू की नीतियां याद आ रही है।
5. गांधी जी की सबसे बड़ी खूबी जनता की नब्ज पकड़ने की थी। अब राहुल गांधी भी जनता की नब्ज पड़कने के लिए अपना कोई भी सार्वजनिक कार्यक्रम बापू से आशीर्वाद लेकर कर रहे है।
6. आज किसानों से जुड़े मुद्दे भी गांधी जी की याद दिलाते हैं। केंद्र में चाहे सरकार किसी भी पार्टी की हो लेकिन गांव में रहने वाले किसान सबसे ज्यादा त्रस्त है। हो सकता है कि राहुल गांधी भी किसान और गांव को ध्यान में रखकर नई रणनीति बना रहे हो।

7. राहुल अपने भाषणों में कई बार ये कह चुके हैं कि भारत की आजादी में अहम किरदार निभाने वाले ज्यादातर नेता एनआरआई यानी प्रवासी भारतीय थे। वह जवाहर लाल नेहरू, महात्मा गांधी मौलान आजाद समेत बीआर अंबेडकर जैसे नेताओं को एनआरआई बता चुके हैं।
इससे अब ये साफ झलक रहा है कि राहुल अपनी एनआरआई वाली छवि को हटाकर जनता से जुड़ाव चाह रहे है।
8. राहुल गांधी चुनाव से पहले एक बार दो दिवसीय दौरे के लिए गुजरात गए थे वहां उन्होंने महात्मा गांधी के साबरमती आश्रम से चुनावी बिगुल बजाया था। साबरमती आश्रम में कांग्रेस अध्यक्ष ने आधा घंटा बिताया था। यह इसलिए भी खास था क्योंकि यहीं से ही महात्मा गांधी ने देश के अहिंसक आंदोलन डांडी यात्रा का नेतृत्व किया था।
9. राहुल ने तब साबरमती आश्रम में रखी विजिटर बुक में लिखा था कि मैं साबरती आश्रम में आकर बहुत सम्मानित महसूस कर रहा हूं। क्योंकि में महात्मा गांधी और उनके विचारों का अनुयायी हूं। भारत बंद की शुरुआत से पहले राजघाट में जाकर बापू की समाधि पर जल चढ़ाना कांग्रेस की रणनीति का एक पैंतरा हो सकता है।
10. राहुल कई बार मंदिरों में दर्शन के लिए गए हैं जहां उनकी ऐसी धार्मकि यात्राओं पर भाजपा निशाना साध चुकी है। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर भी भाजपा ने निशाना साधा था। जबकि कांग्रेस अध्यक्ष कई बार पत्रकार वार्ता में कह चुके हैं कि वह एक सच्चे शिव भक्त है।
अब इससे दो बाते सामने आ रही है। एक तरफ राहुल महात्मा जी को अपना आदर्श मानते हैं वहीं वह खुद को शिव भक्त बातकर अब राहुल ने 2019 के लिए कमर कसनी शुरू कर दी है।
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