उत्तराखंड: सौर और पिरुल ऊर्जा से रोशन होंगे पहाड़ के गांव, पलायन पर लगेगी लगाम

डीएन ब्यूरो

उत्तराखंड सरकार ने ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने समेत राज्य में मौजूद संसाधनों का भरपूर इस्तेमाल करने का निर्णय लिया है। सरकार ने राज्य के गांवों को सौर और पिरुल ऊर्जा से रोशन करने के लिये निजी क्षेत्र को ऊर्जा के नए उद्यम लगाने का न्योता दिया है। पढ़ें डाइनामाइट न्यूज की स्पेशल रिपोर्ट..

फाइल फोटो
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देहरादून: प्रदेश में हो रहे पलायन को रोकने समेत पहाड़ों में स्थित गांवों को रोशन करने के लिये सरकार ने अब एक नयी तकनीक खोज निकाली है। यह तकनीक पलायन को रोकने में भी कारगर हो सकती है। उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों तथा ईंधन आधारित सह उत्पादकों से विद्युत आपूर्ति के लिए राज्य में नई नीति लागू कर दी है। इसके तहत राज्य में सौर और पिरूल उर्जा से पहाड़ों में नये रोजगार भी उत्पन्न होंगे।

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सरकार की इस नई नीति के तहत इस योजना में हिस्सा लेने वाले लोग शनिवार से आवेदन भी कर सकते है साथ ही सरकार द्वारा इस पर 70 प्रतिशत तक की सब्सिडी भी दी जायेगी। पहाड़ों में बिजली कमी को देखते हुए व लघु उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये सरकार ने यह कदम उठाया गया है। जिससे ग्रामीण लोगों को रोजगार के नये अवसर मिलेंगे।

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उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष ने इसके बारे में जानकारी देते हुए बताया कि लोगों को पहले 1000 किलोवाट तक की सौर ऊर्जा के प्रोजेक्ट दिये जायेंगे।
पिरुल विद्युत उत्पादन नीति में स्थानीय लोगों के रोजगार को ध्यान में रखते हुए आयोग ने डेढ़ रुपये से लेकर दो रुपये प्रति किलो पिरुल बेचने का निर्णय लिया है। एक व्यक्ति प्रतिदिन 300 से 400 किलोग्राम पिरुल (चीड़ की पत्तियां) एकत्र कर सकता है, इससे प्रतिमाह पांच हजार से छह हजार की आय हो सकती है।

 

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