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नई दिल्ली: नवरात्रि (Navratri) के दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी माता की पूजा की जाती है। माता ब्रह्मचारिणी (Maa Brahmacharini) अपने नाम से ही ज्ञात होती हैं, जिसमें 'ब्रह्म' का अर्थ तपस्या और 'चारिणी' का अर्थ पालन करने वाली है। इन्हें तपस्या की देवी कहा जाता है। मां ब्रह्मचारिणी ने भगवान शिव (Lord Shiv) को अपने पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था, जिसकी वजह से ही वह संसार (World) में ब्रह्मचारिणी के नाम से जानी गई।
इनकी पूजा करने से साधक को दृढ़ संकल्प और धैर्य की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि मां दुर्गा का यह स्वरूप भक्तों को अनंत फल देने वाला है। इनकी उपासना से तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है।
माता को प्रिय भोग:
माता ब्रह्मचारिणी को शक्कर, मिश्री, और पंचामृत का भोग विशेष रूप से प्रिय होता है। इसके साथ ही उन्हें सादा सफेद प्रसाद जैसे दूध, दही, चीनी, और सफेद पुष्प अर्पित किए जाते हैं।
प्रिय फूल:
माता ब्रह्मचारिणी को सफेद रंग के फूल विशेष रूप से प्रिय हैं। पूजा में ज्यादातर सफेद चमेली, मौलसिरी और सफेद कमल का प्रयोग किया जाता है।
ब्रह्मचारिणी माता का मंत्र:
1. ध्यान मंत्र:
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्घकृतशेखराम्।
जपमाला कमण्डलु धरा ब्रह्मचारिणी शुभाम्॥
धवलाम्बरधरा ब्रह्मरूपा पुष्पालंकार भूषिताम्।
परमानंदमयी ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥
2. पूजन मंत्र:
या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥
मां ब्रह्मचारिणी के प्रसिद्ध मंदिर: (Maa Brahmacharini Famous Temple)
ब्रह्मचारिणी माता के मंदिर भारत के विभिन्न हिस्सों में स्थित हैं। इनमें 2 मंदिर प्रमुख हैं:
1. ब्रह्मचारिणी देवी मंदिर (वाराणसी): मां ब्रह्मचारिणी दुर्गा का यह मंदिर वाराणसी में स्थित है। यह मंदिर नवरात्रि के समय विशेष रूप से प्रसिद्ध है, क्योंकि यहां मां ब्रह्मचारिणी की पूजा और दर्शन के लिए भारी संख्या में भक्त आते हैं। काशी में स्थित यह मंदिर अत्यंत प्राचीन और धार्मिक महत्व का है, जहां मां ब्रह्मचारिणी की पूजा तपस्या और संयम की देवी के रूप में की जाती है।
मां ब्रह्मचारिणी का यह मंदिर उन भक्तों के लिए विशेष स्थान रखता है, जो जीवन में कठिनाइयों का सामना करते हुए संयम, धैर्य, और आत्मनियंत्रण की शक्ति प्राप्त करना चाहते हैं। नवरात्रि के दूसरे दिन यहां विशेष पूजन और हवन का आयोजन होता है, जहां मां के दर्शन से भक्तों को विशेष आध्यात्मिक लाभ मिलता है।
2. बगोई माता मंदिर (मध्य प्रदेश):
बगोई माता का मंदिर मध्य प्रदेश के देवास जिले के जंगलों में स्थित है। इस मंदिर में मां बगोई की पूजा देवी ब्रह्मचारिणी के रूप में की जाती है। नवरात्र के दौरान यहां पर मां के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु गण पहुंचते हैं।
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Published : 3 October 2024, 3:03 PM IST
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