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नई दिल्ली: शारदीय नवरात्रि 26 सितम्बर से शुरू हो रही है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा होती है और व्रत रखे जाते हैं। नवरात्रि में कलश स्थापना और ज्वार या जौ का बहुत अधिक महत्व होता है। नवरात्रि के पहले दिन ही कलश स्थापना के साथ ही जौ बोए जाते हैं।
कलश को गणेशजी का प्रतीक माना जाता है। इसलिए नवरात्रि के अनुष्ठान में किसी तरह का कोई विघ्न न आए इसके लिए कलश की स्थापना करना शुभ माना जाता है। कलश स्थापना करने से घर में सकारात्मकता का वास होता है और घर में सुख समृद्धि बनी रहती है।

नवरात्रि में इसलिए बोए जाते हैं जौ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जौ को भगवान ब्रह्मा का प्रतीक माना जाता है। इसीलिए नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना के समय जौ की सबसे पहले पूजा की जाती है और उसे कलश में भी स्थापित किया जाता है। सृष्टि की पहली फसल जौ को ही माना जाता है। इसलिए जब भी देवी-देवताओं की पूजा और हवन के समय जौ ही अर्पित किए जाते हैं।
साथ ही ये भी कहा जाता है कि जौ अन्न ब्रह्मा के सामान है और अन्न का हमेशा सम्मान करना चाहिए। इसलिए पूजा में जौ का इस्तेमाल किया जाता है। नवरात्रि में कलश स्थापना के दौरान बोया गया जौ दो-तीन दिन में ही अंकुरित हो जाता है।

ऐसे उगाएं नवरात्रि में जौ
सफेद जौ का महत्व
सफेद जौ उगना सबसे उत्तम व अति शुभ माना गया है। कहते हैं कि जहां सफेद जौ उगते हैं, वहां मां नव दुर्गा की शत-शत कृपा होती है। इसी क्रम में जौ का नहीं उगना अथवा काले जौ उगने को अशुभ माना जाता है। नवरात्रि के समापन पर इनको बहते पानी में प्रवाहित कर दिया जाता है। मान्यता के अनुसार नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना के क्रम में कलश स्थापना करते समय, पूजा स्थल पर ज्वारे इसलिए बोये जाते हैं क्योंकि हिन्दू धर्म ग्रंथों में सृष्टि की शुरूआत के बाद पहली फसल जौ ही मानी गयी है।
Published : 22 September 2022, 4:53 PM IST
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