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महराजगंज: डेढ़ सौ करोड़ की लागत से महराजगंज जिले में राष्ट्रीय मार्ग- 730 का निर्माण पीडब्ल्यूडी (नेशनल हाइवे, गोरखपुर यूनिट) द्वारा कराया जा रहा है। इस सड़क के निर्माण में भारी पैमाने पर अनियमितता एवं सरकारी धन की लूट की गयी है। इसकी एसआईटी गठित कर उच्च स्तरीय जांच कराने को लेकर स्थानीय निवासी मनोज टिबड़ेवाल आकाश ने प्रधानमंत्री कार्यालय को 14 बिंदुओं पर शिकायत की है।

उच्च स्तर पर हुई इस शिकायत के बाद भारत सरकार का सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय हरकत में आ गया है। मंत्रालय के डिप्टी सेक्रेटरी, विजिलेंस राम अवतार मीणा ने अपने पत्रांक संख्या सी-13019/59/2019/विजि. के अंतर्गत मंत्रालय के रोड डेवलपमेंट विंग के महानिदेशक को पत्र लिख अनियमितताओं की व्यापक जांच एक कमेटी गठित कराकर कराने को कहा है। 20 दिन के अंदर समयबद्ध जांच रिपोर्ट मांगी गयी है। साथ ही जांच पूरी होने तक सड़क निर्माण से संबंधित भुगतान पर भी रोक लगा दी गयी है। इसकी भनक लगते ही कार्यदायी संस्था के इंजीनियरों में हड़कंप मच गया है।
शिकायत में कहा गया है कि इस सड़क का निर्माण महाकालेश्वर इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड के ठेकेदारों द्वारा कराया जा रहा है। नेशनल हाइवे की ओर से कार्य अधीक्षक मणिकांत अग्रवाल इस निर्माण कार्य का देख-रेख कर रहे हैं। शिकायत में कहा गया है कि सरकारी धन को लूटने के लिए ठेकेदारों और इंजीनियरों ने एक गहरी साजिश रच इस्टीमेट में इच्छानुसार भारी हेरा-फेरी की है।

शेड्यूल ‘ए’ में गुमराह करने वाला तथ्य!
इंजीनियरों ने डीपीआर के शेड्यूल ए में गुमराह करने वाला तथ्य अंकित कर डाला कि 21 किमी के सड़क निर्माण में सभी जगह एक समान 30 मीटर चौड़ी सरकारी भूमि उपलब्ध है।
बदल डाला गया ओरिजनल अलाइनमेंट!
शिकायत में यह भी कहा गया है कि यह सड़क नेशनल हाइवे के मानक को पूरी नहीं करती फिर भी एक साजिश के तहत हनुमानगढ़ी-मुख्य चौराहा-कोतवाली रोड पर सड़क निर्माण के लिए इंजीनियरों ने अभिलेखों के ओरिजनल अलाइनमेंट को बदल दिया।

चेहरी में सर्विस रोड का मनमाना निर्माण
चेहरी में ड्राइंग के अनुसार सर्विस रोड का निर्माण नहीं किया गया है। सड़क निर्माण के डीबीएम कार्य में सेंशर पेवर का प्रयोग नहीं हो रहा है। डब्ल्यूएमएम का कार्य प्लांट से न कराकर मैनुअली कराया जा रहा है। सरकारी भवनों के ध्वस्तीकऱण से प्राप्त मैटेरियल को ठेकेदार द्वारा अपने प्रयोग में लाया जा रहा है जबकि इसके नीलामी की एक अलग शासकीय प्रक्रिया है।
मिट्टी भराई में 9 करोड़ का खेल!
नगरीय क्षेत्र में मिट्टी भराई के नाम पर नौ करोड़ रुपये का अर्थ वर्क सरासर संदेह के घेरे में है क्योंकि जहां पर पहले से मिट्टी भरी हुई है वहां पर भी मिट्टी भराई का धन इस्टीमेट में शामिल कर दिया गया है।
बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी की है चर्चा
आनन-फानन में नियमों को ताक पर रखकर जिस तरह गैरकानूनी तरीके से अतिक्रमण के नाम पर स्थानीय जनता को उजाड़ा गया उसके पीछे बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी का काला खेल नजर आ रहा है, अब जब व्यापक जांच होगी तभी साफ होगा कमीशन के खेल में किस-किस के हाथ रंगे हैं और घोटालेबाज इंजीनियरों को स्थानीय स्तर पर किस-किसका संरक्षण प्राप्त है।
Published : 16 January 2020, 3:26 PM IST
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