महराजगंज: प्रशासन और नेताओं की लगातार लापरवाही से दो खूबसूरत पार्कों ने तोड़ा दम

डीएन संवाददाता

महराजगंज को जिला बने हुए 29 साल हो गये हैं, लेकिन प्रशासन और नेताओं की अनदेखी की वजह से यहां की आम जनता कई समस्याओं से जूझ रही है। डाइनामाइट न्यूज़ की इस रिपोर्ट में पढ़ें, जिला मुख्यालय पर मौजूद बड़ी समस्या के बारे में..

लोहिया पार्क के तालाब में दूषित गन्दा पानी
लोहिया पार्क के तालाब में दूषित गन्दा पानी

महराजगंज: पड़ोसी राष्ट्र नेपाल की तलहटी में स्थित महराजगंज की पहचान भगवान बुद्ध के ननिहाल के रूप में की जाती है। भगवान बुद्ध की जन्मस्थली लुम्बनी जाने के लिए बौद्ध भिक्षु मुख्यालय होते हुए जाते है। इसके अलावा कई और ऐतिहासिक महत्व वाले इस जिले की कई मायनों ें वर्षों से उपेक्षा की जाती रही है, जिसके कारण जनपद से होकर गुजरने वाले पर्यटकों समेत आम जनता को कई बुनुयादी सुविधाओं से जूझना पड़ता है।

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अम्बेडकर पार्क बना गाड़ियों का स्टैंड

 

प्रशासन और जन प्रतिनिधियों की लापरवाही

नेताओं के हाल यह है कि लाख दावे करने के बाद भी जनपद मुख्यालय में एक ऐसा पार्क तक नही बन सका, जहां यहां आने वाले पर्यटक और आम लोग कुछ सुकून के पल बिता सकें। किसी पार्क या आकर्षक सार्वजनिक स्थल के न होने के कारण यहां से होकर गुजरने वाले बौद्ध भिक्षुओं और अन्य सैलानियों को कई तरह की असुविधाओं का सामना करना पड़ता है। कहने को तो यहाँ दो पार्क है, लेकिन दोनों की स्थिति नाजुक है। दोनों पार्क अस्तित्व में आते ही अपनी पहचान खो चुके हैं, जिसके लिये स्थानीय प्रशासन और जन प्रतिनिधि सीधे तौर पर जिम्मेदार है।

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झाड़ियों से पटा राममनोहर लोहिया पार्क

पहचान को जूझ रहा अम्बेडकर पार्क

नगर में पहला अंबेडकर पार्क पूर्व जिलाधिकारी अरुण आर्या के समय बना था। शुरुवाती दौर में मखमली घास पर सुबह-शाम लोग अपने फुर्सत के क्षण बिताते थे और बच्चे खेलते-कूदते थे। तब यहां चारों तरफ़ रंग-बिरंगे फूल लोगों के आकर्षित करते थे लेकिन प्रशासन की उपेक्षा के कारण धीरे धीरे पार्क की शोभा घटती गयी। और आज यह पार्क अपनी पहचान के लिये जूझ रहा है।

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तालाब में जमा दूषित व गंदा पानी

स्वच्छता अभियान के बीच गंदा पड़ा पार्क

मुख्यालय परिसर में स्थित राम मनोहर लोहिया ज्ञान सरोवर पार्क शुरू से ही अपनी पहचान नही बना सका। वर्तमान में हालात ये हैं कि पूरी तरह से झाड़ झंखाड़ से पटा है। पार्क में स्थित तालाब का पानी भी दूषित हो गया है। जिससे लोग किनारे बने कुर्सियों पर बैठना भी कम कर दिए हैं। आश्चर्य की बात यह है कि यह पार्क आला अधिकारियों के कार्यालय या आवास के सामने है। फिरभी किसी का ध्यान इस ओर नही जाता। समूचे जिले में स्वच्छता अभियान चल रहा है लेकिन यहाँ इसका कोई असर नहीं दिख रहा है।
 

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