Bank loan Scam: 754 करोड़ के बैंक लोन घोटाले में पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के विधायक बेटे की बढ़ी मुसीबत

डीएन ब्यूरो

करोड़ों रूपये के बैंक घोटाले में घिरे उत्तर प्रदेश के एक विधायक के खिलाफ सीबीआई के बाद ईडी भी अपना शिकंजा जल्द कस सकती है। डाइनामाइट न्यूज की इस रिपोंर्ट में पढिये, इस घोटाले से जुड़ा ताजा अपडेट

विनय शंकर तिवारी, विधायक, बसपा (फाइल फोटो)
विनय शंकर तिवारी, विधायक, बसपा (फाइल फोटो)

लखनऊ: करोड़ों रूपये के बैंक घोटाले में फंसे उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के बेटे और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के विधायक विनय शंकर तिवारी के खिलाफ कानून की दोहरी मार पड़ती नजर आ रही है। पहले से ही सीबीआई के एफआईआर के कारण कानून शिकंजे में आये बसपा विधायक के खिलाफ अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच भी जल्द शुरू हो सकती है। विनय शंकत तिवारी समेत उनके परिवार के कई सदस्यों के बैंक खातों पर जांच एजेंसियों की नजर है, जिन्हें खंगालने के बाद विधायक के अलावा उनका पूरा परिवार बड़ी मुसीबत में फंस सकता है।

जानिये क्या है पूरा मामला

विनय तिवारी के खिलाफ बैंक लोन घोटाले को लेकर सीबीआई द्वारा एक एफआआआर दर्ज की गयी है। 754.24 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले के मामले में सीबीआइ दिल्ली की एंटी करप्शन ब्रांच ने आठ अक्टूबर को धोखाधड़ी की यह एफआइआर दर्ज की थी। यह एफआईआर बैंक आफ इंडिया की शिकायत पर दर्ज की गई है। बैंक आफ इंडिया की अगुवाई वाले बैंकों के कंसोर्टियम की ओर से विनय तिवारी की कंपनी को 754.24 करोड़ रुपये बतौर लोन दिये गये। लेकिन आरोपी ने इस लोन में धोखाधड़ी की और कई नोटिस के बाद भी बैंक को लोन की यह रकम समय से नहीं चुकाई। इसके अलावा लोन की रकम को गलत तरीके से भी रूट किया गया, जिसका मकसद बैंक के साथ धोखाधड़ी करना था।

विनय तिवारी इन आरपियों पर शिकंजा 

एफआईआर दर्ज होने के बाद से सीबीआई लगातार अपनी तहकीकात में जुटी हुई है और कम से कम 20 संदिग्ध बैंक खातों पर सीबीआई की नजर है। ये सभी बैंक खाते विनय तिवारी समेत उनके परिवार के सदस्यों, रिश्तेदार और कुछ कंपनियों के नाम पर हैं। इन बैंक खातों में विनय तिवारी की कंस्ट्रक्शन कंपनी गंगोत्री इंटरप्राइसेस लिमिटेड तथा अजीत पांडेय की कंपनी रॉयल इंपायर मार्केटिंग लिमिटेड भी शामिल है। इसके साथ ही सीबीआई इस मामले में बसपा विधायक विनय तिवारी के अलावा उनकी पत्नी रीता तिवारी, अजीत पांडेय, तीन चार्टर्ड अकाउंटेंट समेत लगभग 15 लोगों से पूछताछ करने वाली है।

जानिये कंपनियों के बारे में

सीबीआई द्वारा जिस उक्त मेसर्स गंगोत्री इंटरप्राइजेज के कार्यालयों पर छापेमारी की गयी, वह कंपनी गोरखपुर के बाहुबली नेता व पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के बेटे एवं गोरखपुर के चिल्लूपार क्षेत्र से बसपा के विधायक विनय शंकर तिवारी के नाम पर है। अन्य कंपनी मेसर्स रॉयल एंपायर मार्केटिंग में विनय शंकर तिवारी, उनकी पत्नी रीता तिवारी एवं एक अन्य निदेशक अजीत पांडेय शामिल है। इन सभी को सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर में नामजद किया गया है। 

ईडी की एंट्री से बढ़ेगी मुश्किल 

सीबीआई के अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी इस मामले में जल्द एंट्री कर सकता है। जिसके बाद बसपा विधायक समेत उनके परिवार की मुश्किलें बढ सकती है। यह भी जानकारी है कि ईडी को सीबीआइ द्वारा दर्ज एफआइआर की प्रति मिल चुकी है, जिसका ईडी अध्ययन कर रही है। इसके अलावा सीबीआई द्वारा छापेमारी में जुटाये गये आर्थिक अनियमितताओं से संबंधित दस्तावेजों का भी ईडी द्वारा अध्ययन किया जा रहा है, जिसके बाद ईडी भी करोड़ों रूपये के इस घोटाले की जां में जुट जायेगी और विनय तिवारी समेत केस के संबंधित पक्षों से पूछताछ शुरू करेगी।

विनय शंकर तिवारी का राजनीतिक सफर

सीबीआई की एफआईआर में मुख्य आरोपी विनय शंकर तिवारी वर्ष 2017 में बसपा के टिकट पर गोरखपुर की चिल्लूपार सीट से विधायक चुने गए। उनके पिता हरि शंकर तिवारी लगातार 22 साल तक इसी सीट से विधायक रहे थे। वह वर्ष 1997 से लेकर 2007 तक वह लगातार उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट में मंत्री भी रहे। पूर्वांचल में अपने राजनीतिक रसूख के कारण यह परिवार लगातार चर्चा में रहा है और अब करोड़ों रूपये के बैंक घोटाले नाम आने के बाद से चर्चा में है। बताया जाता है कि राजनीतिक रसूख के बाद भी विनय तिवारी और उनका परिवार इस मामले में अब लगातार घिरता जा रहा है।
 








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